सिद्धार्थनगर। Iran और अमेरिका-इज़राइल के बीच बढ़ते तनाव ने सिद्धार्थनगर के डुमरियागंज में भी चिंता बढ़ा दी है। शिया बाहुल्य कस्बा हल्लौर के आधा दर्जन छात्र इस समय ईरान में रहकर धार्मिक शिक्षा हासिल कर रहे हैं। जंग की खबरों के बाद परिजनों में दहशत का माहौल है। डुमरियागंज क्षेत्र के शिया बाहुल्य कस्बा हल्लौर से करीब आधा दर्जन छात्र-छात्राएं ईरान के विभिन्न शहरों में दीन की तालीम हासिल कर रहे हैं।
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ईरान और अमेरिका-इज़राइल के बीच बढ़े सैन्य तनाव की खबरों के बाद गांव में बेचैनी का माहौल है।परिजनों का कहना है कि रविवार सुबह उन्हें ईरान में हमलों और वहां के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई से जुड़ी खबरें मिलीं, जिसके बाद उनकी चिंता और बढ़ गई। जंग ने परिजनों की नींद उड़ा दी है। मीडिया से बात करते हुए परिजनों ने बताया कि नेटवर्क बाधित होने से बातचीत नहीं हो पा रही है। हम लोगों के अंदर डर बना हुआ है।

परिजनों ने हालात बिगड़ता देख भारत सरकार से मदद की मांग की है। फिलहाल गांव में दहशत और दुआओं का माहौल है। लोग अपने बच्चों की सलामती के लिए अल्लाह से दुआ कर रहे हैं। ईरान में पढ़ाई कर रहे इन छात्रों की सलामती की दुआ के साथ हल्लौर गांव के लोग हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहे हैं।
मौलाना सहकार हुसैन ने बताया कि USA इजराल ईरान को बात करनी चाहिए थी बातचीत का दौर चालू भी था तभी हमारे धर्मगुरु सैय्यद अली खामनेई को शहीद कर दिया जाता है। शहादत में उनके परिवार के और कई लोग शामिल हैं। अमेरिका की हिस्ट्री रही है लेकिन उसे न सिर्फ अफगानिस्तान में इराक ना अन्य किसी देश में कामयाबी मिली है।
(रिपोर्ट- दीप यादव, सिद्धार्थनगर)
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