37 C
Lucknow
Wednesday, March 11, 2026

ब्लूटूथ का नाम क्यों रखा गया था ब्लूटूथ, कैसे हुई थी इस तकनीक की शुरुआत?

टेक्नोलॉजी डेस्क। आज के समय में अगर कोई तकनीक हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुकी है, तो वह Bluetooth है। सुबह उठते ही वायरलेस ईयरफोन कान में लगाना हो, गाड़ी में मोबाइल को म्यूजिक सिस्टम से जोड़ना हो हर जगह ब्लूटूथ मौजूद है। लेकिन हम शायद ही कभी यह सोचते हैं कि इसका नाम ब्लूटूथ क्यों रखा गया?

यह भी पढ़ें-WhatsApp से Arattai पर करना चाहते हैं स्विच? यहां जानें पूरा प्रोसेस

आज से लगभग 1000 साल पहले, यूरोप के उत्तरी हिस्से में वाइकिंग्स नाम की योद्धा जाति रहती थी। इसी दौर में डेनमार्क पर एक राजा शासन करता था, जिसका नाम हैराल्ड गोर्मसन था। उनके पिता गोर्म द ओल्ड डेनमार्क के राजा थे, जिन्होंने डेनमार्क और नॉर्वे को जोड़ने की कोशिश शुरू की थी, लेकिन यह काम पूरा उनके बेटे हैराल्ड ने किया। नॉर्स भाषा में उनका नाम Harald Blatand था, जहां Bla का मतलब नीला और Tand का मतलब दांत होता है और यहीं से Bluetooth पैदा हुआ।

1990 के दशक के समय मोबाइल, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस तेजी से बढ़ रहे थे लेकिन उन्हें आपस में जोड़ने के लिए तारों (केबल) पर निर्भर रहना पड़ता था। वैज्ञानिकों का सपना बिना तार के कम दूरी में कम बिजली खर्च करके डिवाइस आपस में बात कर सकें इसी सोच पर काम कर रहे थे डॉ. जैप हार्टसेन, जो एरिक्सन कंपनी से जुड़े थे।

शुरुआत में ब्लूटूथ को फोन कॉल के लिए हैंड्स-फ्री हेडसेट के लिए और कम दूरी में डेटा भेजने के लिए बनाया गया था। पहले ब्लूटूथ डिवाइस की रेंज सिर्फ 10 मीटर थी और स्पीड भी बहुत कम थी। आज हम Bluetooth 5.0 यूज कर रहे हैं। जिसकी रेंज 240 मीटर तक, बैटरी खपत बहुत कम, कनेक्शन ज्यादा स्थिर, साथ ही म्यूजिक और वीडियो स्ट्रीमिंग हाई क्वालिटी है।

Tag: #nextindiatimes #Bluetooth #Technology

RELATED ARTICLE

close button