केरल। केरल का नाम बदलकर केरलम करने को केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। कल कैबिनेट की बैठक में इससे जुड़े एक प्रस्ताव पर मुहर लगाई। इस बीच ‘केरलम’ नाम को लेकर भी लोगों के मन में सवाल हैं। मसलन- केरल के अलग राज्य बनने की कहानी क्या है? केरल का नाम बदलकर केरलम करने की वजह क्या है?
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‘केरल’ शब्द वास्तव में मलयालम के शब्द ‘Keralam’ का ही अंग्रेजी रूप है। इस शब्द का सबसे पुराना ऐतिहासिक उल्लेख सम्राट अशोक के 257 ईसा पूर्व के शिलालेखों में मिलता है, जहां इसे संस्कृति में ‘केतलपुत्र’ कहा गया है, जिसका मतलब है केरल का पुत्र। यह चेर वंश के साम्राज्य की प्राचीनता दर्शाता है।
केरल का नाम बदलने का सबसे अहम कारण इसकी भाषाई पहचान है। दरअसल, ‘केरल’ नाम अंग्रेजी उच्चारण के तहत है, जबकि मलयालम भाषा में इसे ‘केरलम’ बुलाया जाता है। यानी भाषाई आधार पर केरल को अलग पहचान तो मिली, लेकिन अंग्रेजी में इसे केरल बुलाए जाने की वजह से इसका नाम संविधान में केरल ही दर्ज किया गया। एक मान्यता यह है कि केरलम शब्द केरा से बना है, जिसका मतलब नारियल का पेड़ होता है।

ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार, सम्राट अशोक के 257 ईसा पूर्व के शिलालेख में केरलपुत्र शब्द का उल्लेख मिलता है। इससे यह संकेत मिलता है कि उस समय इस क्षेत्र को किसी रूप में केरल से जोड़ा जाता था। दूसरी तरफ केरलम की उत्पत्ति को लेकर भी अलग राय है। एक मत के अनुसार इसका संबंध चेरम से माना जाता है, जो प्राचीन चेरा राजवंश से जुड़ा है। जर्मन विद्वान डॉ. हरमन गुंडर्ट, जिन्होंने पहला मलयालम-अंग्रेजी शब्दकोश तैयार किया था, उन्होंने केरम शब्द को चेरम का रूप बताया और केरलम को उसी से जोड़ा है।
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