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Wednesday, February 25, 2026

बच्चे कब करने लगते हैं अपने पैरेंट्स का कत्ल, इस वजह से हो जाते हैं बागी

डेस्क। लखनऊ में एक कारोबारी की सनसनीखेज हत्या के मामले में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। पुलिस के मुताबिक, 19 वर्षीय युवक ने अपने ही पिता की गोली मारकर हत्या कर दी। उसने शव के टुकड़े कर दिए। दोनों हाथ अलग किए। घुटनों के नीचे से पैर काटे और सिर धड़ से अलग कर दिया। चलिए आपको बताते हैं कि आखिर बच्चे (children) ऐसा कदम क्यों उठा लेते हैं?

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आरोपी पर नीट जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी को लेकर दबाव था, जिससे तनाव बढ़ता गया। हत्या के बाद आरोपी ने सबूत छिपाने के लिए बेहद भयावह कदम उठाया। लोगों के मन में सवाल उठने लगे हैं कि आखिर बच्चों में ऐसा क्या बदलाव होने लगा है कि वे अपने ही पैरेंट्स को मारने लगे हैं?

दरअसल जब बच्चा गुस्से को कंट्रोल नहीं कर पाता और परिवार से इमोशनली दूरी बना लेता है तो सहानुभूति कम हो जाती है। इसके बाद वह छोटी-छोटी बातों पर आक्रामक प्रतिक्रिया देने लगता है, तब इसे चेतावनी संकेत माना जाना चाहिए। कई मामलों में लगातार अपमान, घरेलू तनाव, नशे का प्रभाव, मेंटल हेल्थ समस्याएं या डिजिटल कंटेंट से प्रभावित हिंसक सोच भी भूमिका निभाती हैं।

यदि बच्चा बार-बार ‘नफरत’, ‘बदला’ या ‘किसी को नुकसान’ जैसी बातें करने लगे, सामाजिक रूप से अलग रहने लगे या व्यवहार में अचानक बड़ा बदलाव दिखे तो माता-पिता को विशेष रूप से ध्यान देना चाहिए। किशोरावस्था में बागी व्यवहार सामान्य सीमा तक स्वाभाविक हो सकता है, लेकिन जब यह नियम तोड़ने से आगे बढ़कर आक्रामकता, क्रूरता या संवेदनहीनता में बदलने लगे, तब तुरंत काउंसलिंग और साइकोलॉजिकल मूल्यांकन जरूरी है। समय पर बातचीत, इमोशनल सहयोग और पेशेवर मदद ऐसी समस्याओं को काफी हद तक कम कर सकती है।

Tag: #nextindiatimes #Lucknow #MurderCase

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