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Monday, May 18, 2026

क्रिकेट में कभी जमीन पर लुढ़काते हुए फेंकते थे गेंद, ऐसे हुई राउंडआर्म की शुरुआत

स्पोर्ट्स डेस्क। आज दुनिया भर में क्रिकेट का जो रोमांच हम देखते हैं, उसकी असल जान गेंदबाजों की रफ्तार और उनकी घूमती हुई गेंदें हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमेशा से क्रिकेट में ऐसे गेंद नहीं फेंकी जाती थी? शुरुआत में गेंदबाज आज की तरह हाथ घुमाकर नहीं, बल्कि जमीन से सटाकर गेंद को लुढ़काते थे।

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मॉडर्न बॉलिंग का इतिहास जानने के लिए हमें क्रिकेट के शुरुआती दिनों में जाना होगा, जब केवल अंडरआर्म यानी हाथ को नीचे रखकर गेंदबाजी (Bowling) करने का चलन था। उस दौर में गेंदबाज गेंद को हवा में फेंकने के बजाय सीधे जमीन पर लुढ़काते हुए बल्लेबाज तक पहुंचाते थे। उस समय की पिचें भी बहुत उबड़-खाबड़ होती थीं लेकिन जैसे-जैसे समय बदला और खेल के मैदान बेहतर होने लगे, बल्लेबाजों ने इन लुढ़कती गेंदों पर आसानी से खूब सारे रन बनाने शुरू कर दिए।

जब बल्लेबाजों को रोकना मुश्किल हो गया, तब गेंदबाजों ने नए रास्ते तलाशने शुरू किए। इसी कोशिश में 1800 के दशक में राउंडआर्म गेंदबाजी का जन्म हुआ। इस तकनीक में गेंदबाज अपने हाथ को कंधे के बिल्कुल समानांतर यानी सीधा रखकर गेंद फेंकते थे।

इतिहास बताता है कि इस अनोखी शैली की शुरुआत केंट के रहने वाले जॉन विल्स और उनकी बहन क्रिस्टीना विल्स ने की थी। क्रिस्टीना को अपने घेरदार कपड़ों की वजह से नीचे से गेंद फेंकने में दिक्कत होती थी, इसलिए उन्होंने हाथ को थोड़ा ऊपर उठाकर फेंकना शुरू किया।

राउंडआर्म की इस नई तकनीक ने क्रिकेट की दुनिया में एक बड़ा तहलका मचा दिया। कई सालों तक इस बात को लेकर विवाद चलता रहा कि हाथ को कितना ऊपर उठाया जा सकता है। अंपायरों ने कई बार इसे नियमों के खिलाफ बताते हुए नो-बॉल देना शुरू कर दिया। इस बात से नाराज होकर कई गेंदबाज और टीमें मैदान छोड़कर बाहर तक चली गईं। क्रिकेट जगत इस बात को लेकर दो धड़ों में बंट गया था कि खेल का यह नया तरीका सही है या गलत।

तमाम विवादों और बहसों के बाद आखिरकार क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था मैरीलेबोन क्रिकेट क्लब को झुकना पड़ा। साल 1864 में एमसीसी ने आधिकारिक तौर पर नियमों में बदलाव करते हुए ओवरआर्म यानी हाथ को कंधे से ऊपर ले जाकर गेंद फेंकने को कानूनी मंजूरी दे दी। क्रिकेट के इतिहास में इसी साल को असल मायनों में मॉडर्न बॉलिंग का जन्मवर्ष माना जाता है। इस फैसले ने गेंदबाजों को एक नई आजादी दी और खेल को पूरी तरह से बदल दिया। ओवरआर्म बॉलिंग को मंजूरी मिलते ही गेंदबाजों को गेंद में भयानक रफ्तार और खतरनाक उछाल पैदा करने की ताकत मिल गई।

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