डेस्क। भारतीय रेलवे ने एक नए दौर में कदम रखा। देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट पर चली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। करीब 90 किलोमीटर लंबे इस रूट पर चलने वाली 10 कोच की यह ट्रेन लगभग 2 घंटे में सफर पूरा करेगी और रास्ते में करीब 11 स्टेशनों पर रुकेगी।
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हाइड्रोजन ट्रेन तकनीक को सबसे पहले बड़े स्तर पर अपनाने वाला देश जर्मनी है। यहां अल्स्टॉम कंपनी में बनाई गई कोराडिया आईलिंट (Coradia iLint) दुनिया की पहली पूरी तरह हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली यात्री ट्रेन बनी। इसके सफल संचालन के बाद जर्मनी ने अपने कई रूटों पर हाइड्रोजन ट्रेनों का विस्तार किया और यह तकनीक दुनिया के लिए एक उदाहरण बन गई।
जापान लंबे समय से हाइड्रोजन तकनीक पर काम कर रहा है। यहां हायबारी (Hybari) जैसी आधुनिक हाइड्रोजन ट्रेन (Hydrogen Train) विकसित की जा रही है, जो फ्यूल सेल और बैटरी दोनों के हाइब्रिड सिस्टम पर आधारित है। इसे शहरी और क्षेत्रीय रेल नेटवर्क में शामिल करने की योजना है।

फ्रांस भी हाइड्रोजन रेल तकनीक को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। यहां की कंपनी अल्स्टॉम ने ही जर्मनी के लिए हाइड्रोजन ट्रेन तैयार की थी। अब फ्रांस अपने यहां भी इन ट्रेनों का परीक्षण और संचालन शुरू कर रहा है। सरकार ने इसे कार्बन उत्सर्जन कम करने की अपनी रणनीति का जरूरी हिस्सा बनाया है।
चीन भी हाइड्रोजन ट्रेनों के विकास में तेजी से आगे बढ़ रहा है। वहां 1200 हॉर्सपावर तक के हाइड्रोजन इंजन विकसित किए गए हैं, जो अलग-अलग तरह के रेल मार्गों पर चलने में सक्षम हैं। चीन केवल यात्री ट्रेनों ही नहीं, बल्कि मालगाड़ियों के लिए भी इस तकनीक पर काम कर रहा है।
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