FIR और NCR में क्या है अंतर, जानें दोनों एक-दूसरे से कितने अलग?

डेस्क। दिल्ली के तिलक नगर में हुए थप्पड़कांड के बाद एफआईआर (FIR) और एनसीआर (NCR) के अंतर को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जब भी कोई कानूनी विवाद होता है, तो लोग अक्सर एफआईआर की बात करते हैं। हालांकि, कानून में अपराध की गंभीरता के आधार पर रिपोर्ट दर्ज करने की प्रक्रिया पूरी तरह बदल जाती है। आइए समझते हैं कि एफआईआर और एनसीआर में क्या अंतर है और पुलिस इनमें कैसे कार्रवाई करती है।

यह भी पढ़ें-ईडी पर कब-कब हुई है FIR, क्या इस पर कार्रवाई कर सकती है बंगाल पुलिस

FIR और NCR क्या हैं?

  • FIR (First Information Report): इसे ‘प्रथम सूचना रिपोर्ट’ कहा जाता है। यह किसी भी गंभीर अपराध की पुलिस के पास दर्ज पहली आधिकारिक जानकारी होती है।
  • NCR (Non-Cognizable Report): इसे ‘गैर-संज्ञेय रिपोर्ट’ कहते हैं। यह ऐसे मामलों में दर्ज की जाती है जो कम गंभीर होते हैं या जिनमें हिंसा शामिल नहीं होती।

किन मामलों में कौन सी रिपोर्ट दर्ज होती है?

  • FIR के तहत दर्ज मामले:
  • हत्या, अपहरण, डकैती, यौन उत्पीड़न या पोक्सो एक्ट जैसे बड़े और गंभीर अपराधों में सीधे एफआईआर दर्ज की जाती है।
  • NCR के तहत दर्ज मामले:
  • मोबाइल फोन या जरूरी दस्तावेज गुम होना, बिना हाथापाई के कहासुनी, गाली-गलौज, पड़ोसियों के मामूली विवाद या साधारण धोखाधड़ी में एनसीआर लिखी जाती है।

गिरफ्तारी के अधिकारों में मुख्य अंतर:

  1. FIR दर्ज होने पर:
  2. पुलिस अधिकारी को आरोपी को बिना किसी कोर्ट वारंट के तुरंत गिरफ्तार करने का अधिकार होता है।
  3. NCR दर्ज होने पर:
  4. पुलिस सीधे किसी व्यक्ति को गिरफ्तार नहीं कर सकती। आरोपी पर कार्रवाई करने या उसे हिरासत में लेने के लिए पुलिस को पहले अदालत (मजिस्ट्रेट) से अनुमति लेनी पड़ती है।

जांच और कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया:

  • FIR में त्वरित कार्रवाई:
  • एफआईआर दर्ज होते ही जांच अधिकारी तुरंत घटनास्थल पर जाकर सबूत जुटाना और बयान दर्ज करना शुरू कर देता है।
  • NCR में अदालती आदेश की आवश्यकता:
  • एनसीआर दर्ज होने के बाद पुलिस अपने स्तर पर कोई जांच शुरू नहीं करती।
  • यदि पीड़ित आगे की कार्रवाई चाहता है,
  • तो उसे संबंधित मजिस्ट्रेट की अदालत में अर्जी देनी होती है।
  • जब अदालत जांच का लिखित आदेश देती है, तभी पुलिस मामले की छानबीन शुरू करती है।

संक्षेप में कहें तो एफआईआर संज्ञेय (गंभीर) अपराधों के लिए होती है, जिसमें पुलिस को तुरंत जांच और गिरफ्तारी का अधिकार होता है। वहीं एनसीआर गैर-संज्ञेय (मामूली) विवादों का रिकॉर्ड होती है, जिसमें आगे की कार्रवाई के लिए कोर्ट का आदेश अनिवार्य होता है।

RELATED ARTICLE