सिद्धार्थनगर। विकासखंड भनवापुर के सेमरा बनकसिया गांव (टोला कलीचक) का रहने वाला कक्षा पांच का छात्र (student) करीम इन दिनों सोशल मीडिया और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। दोनों पैरों से पूरी तरह दिव्यांग होने के बावजूद करीम का पढ़ाई के प्रति समर्पण और उसका हौसला हर किसी को प्रेरित कर रहा है। उसकी आंखों में एक बड़ा सपना है—पढ़-लिखकर डॉक्टर बनना और समाज के गरीब व जरूरतमंद लोगों का मुफ्त इलाज करना।
रोजाना की चुनौतियां और कठिनाइयां:
करीम पास के ही गांव ‘हिजुरा’ में स्थित प्राथमिक विद्यालय में पढ़ता है। घर से स्कूल की दूरी तय करना उसके लिए एक बड़ी जंग जैसा है। दिव्यांगता के कारण पैदल चलना असंभव है ।
परिवार की आर्थिक स्थिति इतनी मजबूत नहीं है कि उसे कोई साधन उपलब्ध कराया जा सके।
बारिश के मौसम में उसकी मुश्किलें बढ़ जाती हैं।
गांव के कच्चे रास्तों पर पानी भर जाता है।
ऐसे में स्कूल जाना बहुत कठिन हो जाता है।
इसके बावजूद उसका पढ़ाई का जज्बा कम नहीं होता।
वह हर कठिनाई से लड़कर स्कूल जरूर जाता है।
प्रशासन और मुख्यमंत्री से मदद की गुहार:
अपनी इस कठिन राह को आसान बनाने के लिए करीम ने जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से मदद की गुहार लगाई है।
करीम की मांग है कि उसे एक इलेक्ट्रिक ट्राई-साइकिल उपलब्ध कराई जाए।
ताकि वह बिना किसी की मदद के आसानी से स्कूल आ-जा सके।

मां की आंखों में बेटे का भविष्य:
करीम की मां रुबीना बानो बताती हैं कि उनका परिवार बहुत गरीब है। बेटा बचपन से ही दोनों पैरों से दिव्यांग है, लेकिन उसमें पढ़ने की अद्भुत ललक है। रुबीना बानो का कहना है कि वे चाहती हैं कि सरकार या प्रशासन से उनके बेटे को इलेक्ट्रिक ट्राई-साइकिल मिल जाए।
इससे न केवल करीम की राह आसान होगी, बल्कि उसका डॉक्टर बनने का सपना भी टूटने से बच जाएगा।
यदि प्रशासन समय पर इस होनहार और संघर्षशील छात्र की मदद करता है, तो करीम जैसी प्रतिभाएं अपनी शारीरिक कमी को पीछे छोड़कर सफलता की नई मिसाल कायम कर सकती हैं।
(रिपोर्ट-दीप यादव, सिद्धार्थनगर)
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