नई दिल्ली। देश के पूर्व शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान (Dharmendra Pradhan) ने पहली बार अपने इस्तीफे पर बयान दिया। उन्होंने कहा, ‘जेन-जी हमारे ही बच्चे हैं। कुछ लोगों ने उन्हें भटकाने की कोशिश की। मैंने पीएम मोदी से बातचीत करने के बाद ही पद छोड़ा।’ प्रधान ने ये बात भुवनेश्वर की GM यूनिवर्सिटी में कही। यहां उन्होंने छात्रों और शिक्षकों को संबोधित किया।
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उन्होंने कहा, ‘जेन-जी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। देश के युवाओं के संकल्प और आकांक्षाओं के सामने शिक्षा मंत्री की जिम्मेदारियां बहुत छोटी हैं। इसलिए मेरे लिए पद जरूरी नहीं था।’ इस कार्यक्रम के दौरान बीजू जनता दल के कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी की। NEET पेपर लीक पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के 35 दिन बाद प्रधान ने 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा दिया था।

प्रधान ने इस बात पर भी जोर दिया कि माता-पिता, शिक्षकों और समाज की यह जिम्मेदारी है कि वे युवाओं की सिर्फ आलोचना करने के बजाय उन्हें समझें और साथ ही उन्हें अच्छे मौकों और गुमराह करने वाली चीजों के बीच फर्क करना सिखाएं। GM यूनिवर्सिटी में उनके भाषण का मुख्य विषय युवाओं को सशक्त बनाने, शिक्षा और ज़िम्मेदार भागीदारी का महत्व था। उन्होंने यह अहम संदेश भी दिया कि भारत की तरक्की काफी हद तक इस बात पर निर्भर करेगी कि वह अपनी युवा पीढ़ी को कितनी अच्छी तरह समझता है, उनका मार्गदर्शन करता है और उन्हें सशक्त बनाता है।
प्रधान ने ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और BJD अध्यक्ष नवीन पटनायक पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, ‘मैं BJD कार्यकर्ताओं के प्रदर्शन और उनकी नारेबाजी से परेशान नहीं हूं। मैं किसान का बेटा हूं। आप मुझे वापस जाने के लिए कहेंगे, तब भी मैं वापस आऊंगा। मैंने ओडिशा के 4.5 करोड़ लोगों का सिर कभी शर्म से नहीं झुकने दिया। जब तक मैं जिंदा हूं, तब तक मुझ पर जताए गए भरोसे को नहीं तोड़ूंगा और ऐसा कोई काम नहीं करूंगा, जिससे ओडिशा के गौरव और स्वाभिमान को ठेस पहुंचे।’
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