लाइफस्टाइल डेस्क। आयुर्वेद में तांबे के बर्तन में पानी (Water) पीने को सेहत के लिए बहुत तरह से फायदेमंद बताया गया है, फिर जो लोग इस पुराने जीवन विज्ञान पर भरोसा करते हैं, वो बिना सवाल किये इसमें लिखी बातों को फॉलो भी कर लेते हैं। पर कभी सोचा है कि तांबे के बर्तन में पानी से सेहत को कितना फायदा मिलता है और ऐसा करना कितना सुरक्षित है?
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तांबा एक ट्रेस एलीमेंट है जिसकी हमारे शरीर को बहुत कम मात्रा में जरूरत पड़ती है। जबकि यह शरीर के बहुत से कामों में मदद करता है, जैसे- एनर्जी देने में, शरीर के टिशू जोड़ने में और न्यूरोट्रांसमीटर को संतुलित करने में। यह आलू, सीड्स, साबुत अनाज, ऑर्गन मीट और डार्क चॉकलेट में पाया जाता है।
ऐसा माना जाता है कि तांबे के बर्तन में पानी पीने से दिल और दिमाग की सेहत अच्छी रहती है। यह इम्युनिटी अच्छी रखने के साथ ही वजन कम करने और त्वचा को बूढ़ा होने से रोकने में मदद करता है। साइंस की माने तो ये सभी तांबे के सामान्य काम है जो वह हमेशा ही करता है। इसके अलावा, तांबे में एंटीबैक्टीरियल गुण भी होते हैं, ये गुण पानी में मौजूद ई-कोलाई और साल्मोनेला जैसे बैक्टीरिया को खत्म करने में भूमिका निभा सकते हैं।

इसके लिए कम से कम 16-24 घंटे और ज्यादा से ज्यादा 48 घंटों तक तांबे के जग या बोतल में पानी स्टोर करना चाहिए। तांबे का हाई डोज टॉक्सिसिटी में बदल जाता है, जिससे उल्टी, दस्त और पेट के निचले हिस्से में दर्द जैसी परेशानी हो सकती हैं। गंभीर स्थिति में यह लिवर डैमेज और किडनी की बीमारी की स्थिति तक बन सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, 0.47 mg प्रति कप (2 mg प्रति लीटर) से ज्यादा कॉपर इंटेक नहीं लिया जाना चाहिए। अगर 16 घंटे तक तांबे के बर्तन में पानी स्टोर किया जाए तो इससे पानी में कॉपर की टॉक्सिसिटी का खतरा नहीं रहता है।
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