CJI ने विपक्षी नेताओं से मुलाकात से क्यों किया इनकार, देखें कहां फंस रहा पेंच?

नई दिल्ली। चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच जारी खींचतान के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। मुख्य न्यायाधीश (CJI) और विपक्षी गठबंधन INDIA के नेताओं की होने वाली मुलाकात टल गई है। राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी दल चुनाव आयोग से जुड़ी शिकायतों को लेकर चीफ जस्टिस से मिलने का वक्त मांग रहे थे। हालांकि, सीजेआई ने चिट्ठी भेजकर व्यक्तिगत मुलाकात से साफ इनकार कर दिया है। आइए समझते हैं कि इस फैसले के पीछे का कानूनी और संवैधानिक पेंच क्या है।

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सीजेआई ने पत्र में क्या दिया जवाब?

मुख्य न्यायाधीश ने बेहद विनम्रता और स्पष्टता के साथ अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि संवैधानिक व्यवस्था के तहत एक जज अदालत से बाहर किसी राजनीतिक विषय पर चर्चा नहीं कर सकता। सीजेआई ने विपक्षी नेताओं को भरोसा दिलाया कि न्यायपालिका के दरवाजे सबके लिए हमेशा खुले हैं। अगर किसी को चुनाव प्रक्रिया से आपत्ति है, तो वे कानूनी तरीके से सर्वोच्च अदालत में याचिका दायर कर सकते हैं।

मुलाकात न करने की मुख्य वजह क्या है?

मुलाकात से इनकार करने की सबसे बड़ी वजह न्यायिक निष्पक्षता और पुरानी परंपराएं हैं। कानून के अनुसार, जो मामले पहले से अदालत में लंबित हैं, उन पर कोर्ट रूम से बाहर चर्चा नहीं हो सकती। मतदाता सूची से जुड़ी कई याचिकाएं पहले से सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग हैं। ऐसे में नेताओं से व्यक्तिगत मिलना न्यायिक नियमों का उल्लंघन माना जाता।

क्या कहती है न्यायिक आचार संहिता?

सुप्रीम कोर्ट ने 1997 में जजों के लिए एक विशेष आचार संहिता बनाई थी। इस संहिता के नियमों के तहत जजों को सार्वजनिक और राजनीतिक विवादों से एक निश्चित दूरी बनाकर रखनी होती है। कोई भी जज राजनीतिक बहस या जन आंदोलन का हिस्सा नहीं बन सकता।

अदालती विकल्प और न्याय का रास्ता खुला:

मुख्य न्यायाधीश ने साफ किया कि मुलाकात न करने का मतलब न्याय देने से रोकना नहीं है।

उन्होंने कहा कि-

कोई भी पक्ष सही प्रक्रिया का पालन करते हुए अपनी बात कोर्ट के सामने रख सकता है।

अदालत में आने वाली हर याचिका पर नियमों के तहत निष्पक्ष सुनवाई की जाएगी।

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