क्या सरकार के खिलाफ रैली में शामिल हो सकते हैं सरकारी कर्मचारी, जान लें ये नियम?

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने राज्य की सरकारी नौकरियों के इच्छुक उम्मीदवारों के लिए चरित्र सत्यापन (कैरेक्टर वेरीफिकेशन) की प्रक्रिया को और अधिक सख्त बना दिया है।

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हाल ही में जारी नए दिशा-निर्देशों के तहत, यदि कोई उम्मीदवार मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था को बदलने के उद्देश्य से किसी भी प्रकार की हिंसक गतिविधि में शामिल पाया जाता है, तो उसे सरकारी रोजगार के लिए पूरी तरह अयोग्य घोषित किया जा सकता है। इस नीति के सामने आने के बाद से यह सवाल उठने लगा है कि क्या सेवारत सरकारी कर्मचारी सरकार के खिलाफ किसी रैली, प्रदर्शन या विरोध मार्च में हिस्सा ले सकते हैं?

सरकारी कर्मचारियों पर लागू होने वाले आचरण नियम

भारत में सभी लोक सेवकों का आचरण केंद्र और राज्य स्तर के विशिष्ट नियमों द्वारा नियंत्रित होता है,

जिनमें सिविल सेवा आचरण नियम शामिल हैं।

  • राजनीतिक तटस्थता:
  • आचरण नियमों के अनुसार,
  • सरकारी कर्मचारियों को अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करते समय पूरी तरह राजनीतिक तटस्थता बनाए रखनी होती है।
  • प्रतिबंध:
  • कर्मचारियों को ऐसी किसी भी हड़ताल, धरने या विरोध प्रदर्शन में भाग लेने की अनुमति नहीं होती,
  • जो सरकारी नीतियों का विरोध करते हों या सार्वजनिक व्यवस्था में बाधा डालते हों।
  • अनुशासनात्मक कार्रवाई:
  • यदि कोई सेवारत कर्मचारी किसी राजनीतिक दल द्वारा आयोजित रैली या सरकार विरोधी एजेंडे से प्रेरित प्रदर्शन में शामिल होता है,
  • तो इसे सेवा नियमों का सीधा उल्लंघन माना जाता है।
  • ऐसे मामलों में कर्मचारी को निलंबन,
  • विभागीय जांच या यहां तक कि सेवा से बर्खास्तगी जैसी कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

उत्तर प्रदेश के नए चरित्र सत्यापन दिशा-निर्देश और उनके दायरे

उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लाए गए ये नए नियम मुख्य रूप से सीधी भर्ती के माध्यम से सरकारी पदों पर आवेदन करने वाले नए उम्मीदवारों पर लागू होते हैं।

  • हिंसक गतिविधियों पर फोकस:
  • इस नीति के तहत हिंसा, आगजनी, बर्बरता तथा सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने जैसी गतिविधियों को अयोग्यता का आधार बनाया गया है, बशर्ते यह कृत्य शासन में परिवर्तन लाने या मौजूदा सरकार को उखाड़ फेंकने के इरादे से किए गए हों।
  • सेवारत कर्मचारियों पर असर नहीं:
  • ये नए प्रावधान केवल भर्ती से पहले के चरित्र सत्यापन से जुड़े हैं। इनका असर उन लोगों की सेवा स्थिति पर नहीं पड़ता जो पहले से ही सरकारी पदों पर कार्यरत हैं,
  • क्योंकि सेवारत कर्मचारी पहले से ही अपने विभाग के निर्धारित आचरण नियमों के अधीन होते हैं।

राजनीतिक विचारधारा और एफआईआर पर स्थिति स्पष्ट

इस आदेश में यह भी बहुत स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि किसी भी उम्मीदवार को केवल उसकी व्यक्तिगत राजनीतिक विचारधारा के आधार पर अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता है।

  • महज राय से अयोग्यता नहीं:
  • किसी विशेष प्रकार की राजनीतिक राय रखना अपने आप में इन नए दिशा-निर्देशों के तहत अयोग्यता का कारण नहीं बनता है।
  • एफआईआर या लंबित जांच:
  • इसी तरह, केवल किसी थाने में एफआईआर दर्ज होने या किसी लंबित जांच के चल रहे होने मात्र से आवेदक स्वतः ही नौकरी के लिए अयोग्य नहीं माना जाएगा,
  • जब तक कि दोष सिद्ध न हो।

यह नीति शांतिपूर्ण असहमति और हिंसक गतिविधियों के बीच एक स्पष्ट रेखा खींचती है,

जिससे यह सुनिश्चित होता है कि कानून के दायरे में रहकर अपनी राय रखने वाले युवाओं के अधिकारों पर कोई आंच न आए।

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