करवा की टोंटी में क्यों लगाई जाती हैं सींकें? आप भी नहीं जानती होंगी इसका रहस्य

डेस्क। सनातन धर्म और भारतीय संस्कृति में करवा चौथ (Karwa Chauth) के व्रत का बहुत ही विशेष और महत्वपूर्ण स्थान है। यह पावन पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए साल के सबसे खास दिनों में से एक माना जाता है, जिस दिन महिलाएं अपने जीवनसाथी की लंबी आयु, अच्छे स्वास्थ्य और अखंड सौभाग्य के लिए पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं।

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इस व्रत के दौरान रात के समय चंद्रमा के दर्शन करने और उन्हें अर्घ्य देने के बाद ही व्रत का पारण किया जाता है। करवा चौथ की पूजा-अर्चना में कई तरह की पारंपरिक सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, जिनका अपना अलग धार्मिक महत्व होता है। हालांकि, इन सभी सामग्रियों में करवा की टोंटी पर लगाई जाने वाली सींकें सबसे खास और अलग मानी जाती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन विशेष सींकों के बिना करवा चौथ की पूजा अधूरी मानी जाती है।

करवा चौथ की मुख्य पूजा सामग्री:

करवा चौथ के दिन की जाने वाली पूजा की थाली और व्यवस्था में कई पवित्र चीजों को शामिल किया जाता है।

यदि हम इसकी मुख्य पूजन सामग्री की बात करें,

तो इसमें निम्नलिखित चीजें प्रमुख रूप से शामिल होती हैं:

  • मिट्टी का करवा:
  • जल अर्पित करने और पूजा के लिए विशेष महत्व रखता है।
  • छलनी:
  • जिससे चंद्रमा और पति के दर्शन किए जाते हैं।
  • सींकें:
  • करवा की टोंटी में लगाई जाने वाली विशेष सींकें।
  • सुहाग का सामान:
  • माता पार्वती को अर्पित करने और श्रृंगार के लिए।
  • दीपक और चावल:
  • अखंड ज्योत जलाने और पूजा के अन्य विधान के लिए।

इन सभी सामग्रियों में सींकों का अपना एक अलग और अनूठा स्थान है।

शास्त्रीय नियमों और परंपराओं के अनुसार,

यदि करवा चौथ की पूजा में इन सींकों का उपयोग न किया जाए,

तो उस पूजा को पूर्ण नहीं माना जाता है।

करवा की टोंटी में सींकें लगाने से जुड़ी पौराणिक कथा:

करवा चौथ के पावन अवसर पर करवा के टोंटी में सींकों को लगाने के पीछे एक बेहद दिलचस्प और प्राचीन पौराणिक कथा जुड़ी हुई है, जो सदियों से चली आ रही है।

इन सींकों को सीधे तौर पर ‘करवा माता’ की शक्ति और उनके तप से जोड़कर देखा जाता है।

  • मगरमच्छ से पति की रक्षा:
  • पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार करवा माता के पति का पैर एक नदी में मगरमच्छ ने पकड़ लिया था। उस विकट परिस्थिति में करवा माता ने अपनी असीम शक्ति और बुद्धि का परिचय देते हुए इन्हीं सींकों का इस्तेमाल करके उस खतरनाक मगरमच्छ को बांध दिया था।
  • यमराज और चित्रगुप्त से जुड़ा प्रसंग:
  • इसके बाद करवा माता यमराज के पास पहुँचीं। उस समय स्वर्गलोक में चित्रगुप्त जी सभी मनुष्यों के जीवन का लेखा-जोखा लिख रहे थे। तब करवा माता ने इन्हीं सींकों की मदद से चित्रगुप्त जी के पन्नों से अपने पति की आयु और उस प्रसंग को अलग कर दिया था।
  • प्राणों की रक्षा का वरदान:
  • माता के इस साहस और समर्पण को देखकर यमराज को उनके पति की रक्षा करनी पड़ी और उन्हें लंबी आयु का वरदान देना पड़ा।

इसी ऐतिहासिक और पौराणिक मान्यता के आधार पर यह विश्वास किया जाता है कि करवा चौथ की पूजा में इन सींकों का प्रयोग करने से पति की रक्षा होती है और उन्हें दीर्घायु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

पूजा में कितनी सींकों का किया जाता है इस्तेमाल?

करवा चौथ की पूजा के दौरान सींकों को रखने और लगाने के भी कुछ खास नियम होते हैं। पूजा में कुल 28 सींकों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें 7-7 की संख्या में 4 अलग-अलग जगहों पर रखा जाता है:

  1. इनमें से मुख्य रूप से 7 सींकें करवा की टोंटी पर लगाई जाती हैं।
  2. जब महिलाएं हाथ में करवा लेकर करवा माता की कथा सुनती हैं या उनकी परिक्रमा करती हैं, तब भी करवा की टोंटी में ये सींकें विधिवत रूप से लगी होनी चाहिए।

संक्षेप में कहें तो, करवा चौथ की पूजा में इन सींकों का प्रयोग अनिवार्य माना गया है। इनके उपयोग के बिना यह पावन व्रत और पूजा पूर्ण नहीं मानी जाती है और न ही इसका पूरा फल प्राप्त होता है।

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