दुनिया की सबसे नशीली शराब कौन सी, एक घूंट पीते ही हो जाती है ऐसी हालत…

डेस्क। दुनिया भर में शराब की अलग-अलग किस्में मिलती हैं, जिनमें अल्कोहल (alcohol) का स्तर अलग-अलग होता है। आमतौर पर बाजार में मिलने वाली बीयर में 4 से 8 प्रतिशत और वाइन में 10 से 15 प्रतिशत अल्कोहल पाया जाता है। वहीं दूसरी तरफ, व्हिस्की, रम और वोडका जैसी ड्रिंक्स में अल्कोहल की मात्रा 35 से 45 प्रतिशत के बीच होती है। लेकिन दुनिया में कुछ ऐसी हाई-प्रूफ स्पिरिट्स भी मौजूद हैं, जिनमें अल्कोहल की मात्रा सामान्य ड्रिंक्स से कहीं ज्यादा होती है।

यह भी पढ़ें-कांच की बोतल में ही क्यों मिलती है शराब, जान लें वजह

दुनिया की सबसे तेज शराब कौन सी है?

दुनिया की सबसे मजबूत कमर्शियल स्पिरिट्स की बात करें, तो पोलैंड में बनने वाली स्पिरिटस रेक्टीफिकोवानी (Spirytus Rektyfikowany) का नाम सबसे ऊपर आता है। इस शराब में 96 प्रतिशत अल्कोहल (ABV) होता है। इसका मतलब यह है कि 100 मिलीलीटर की बोतल में करीब 96 मिलीलीटर pure एथेनॉल होता है। इसे 192 प्रूफ के रूप में भी जाना जाता है।

इसके अलावा,

दुनिया की सबसे मजबूत स्पिरिट्स की लिस्ट में अमेरिका का एवरक्लियर 190 (Everclear 190) दूसरे नंबर पर आता है।

इसमें 95 प्रतिशत ABV यानी 190 प्रूफ अल्कोहल पाया जाता है।

क्या 96 प्रतिशत वाली शराब को सीधे पी सकते हैं?

96 प्रतिशत अल्कोहल वाली इस ड्रिंक को कभी भी सामान्य शराब की तरह सीधे नहीं पिया जाता। इसे सीधे पीना सेहत के लिए बेहद खतरनाक हो सकता है। यह शरीर में बहुत तेजी से एथेनॉल पहुंचाती है, जिससे अल्कोहल टॉक्सिसिटी और गले की नसों में जलन का गंभीर खतरा पैदा हो सकता है।

निर्माता भी इसे सीधे पीने के बजाय डाइल्यूट करके, फलों की वाइन या अन्य लिकर बनाने के लिए उपयोग करने की सलाह देते हैं।

आखिर 100 प्रतिशत अल्कोहल क्यों नहीं बनता?

शराब बनाने के दौरान एथेनॉल और पानी को अलग करने के लिए डिस्टिलेशन प्रक्रिया अपनाई जाती है।

जब एथेनॉल और पानी का मिश्रण 96 प्रतिशत तक पहुंचता है,

तो एक ऐसी स्थिति बनती है जिसे एज़ियोट्रोप (Azeotrope) कहा जाता है।

इस स्थिति में साधारण डिस्टिलेशन से और ज्यादा शुद्धता हासिल करना लगभग असंभव हो जाता है।

यही कारण है कि बाजार में मिलने वाली सबसे मजबूत ड्रिंक्स 95 से 96 प्रतिशत तक ही सीमित रहती हैं।

Tag: #nextindiatimes #alcohol #Lifestyle

RELATED ARTICLE