कभी चोरों-डकैतों का अड्डा था ‘चोर बागान’, अब कोलकाता के सबसे प्रसिद्ध दुर्गा पंडालों में एक

कोलकाता। कोलकाता के उत्तर भाग में स्थित चोर बागान (Chor Bagan) इलाका अपनी भव्य दुर्गा पूजा और अनोखी थीम के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। लेकिन शनिवार शाम को चोर बागान सर्वजनिन दुर्गा पूजा पंडाल में हुई एक दुखद भगदड़ की घटना ने पूरे शहर को स्तब्ध कर दिया। इस हादसे में 19 लोगों की जान चली गई और 24 लोग घायल हो गए।

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मृतकों में 13 महिलाएं, चार पुरुष और दो बच्चे शामिल हैं। गंभीर रूप से घायलों को एसएसकेएम अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस घटना के बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने शहर के सभी बड़े पूजा पंडालों की सुरक्षा व्यवस्था की जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया है।

आखिर कैसे पड़ा इस जगह का नाम चोर बागान?

आज जहां बहुमंजिला इमारतें, घनी बस्तियां और चहल-पहल दिखाई देती है, सदियों पहले यह इलाका एक घना और भयानक जंगल हुआ करता था। इतिहास और स्थानीय लोक-कथाओं के अनुसार, इस नाम के पीछे दो मुख्य ऐतिहासिक कारण जुड़े हैं:

  1. अपराधियों और डकैतों का गढ़:
  2. सदियों पहले हुगली नदी की ओर जाने वाले तीर्थयात्री इसी जंगल के रास्ते से गुजरते थे। घने जंगलों में छिपे डकैत और चोर अक्सर यात्रियों पर हमला करके उनका सारा कीमती सामान लूट लेते थे। लगातार हो रही लूटपाट और चोरों का अड्डा बने रहने के कारण लोग इसे चोर बागान यानी चोरों का बाग कहने लगे।
  3. जंगल से संभ्रांत संस्कृति का सफर:
  4. ब्रिटिश शासनकाल के दौरान जब इस जंगल को साफ किया गया, तो शहर के नामी और कुलीन परिवारों ने यहां बसना शुरू किया।
  5. राजा राजेंद्र मल्लिक के वंशज और मित्र परिवार जैसे प्रतिष्ठित लोगों ने यहां भव्य हवेलियां बनवाईं।
  6. देखते ही देखते यह इलाका एक बड़े सांस्कृतिक केंद्र में बदल गया,
  7. लेकिन इसका ऐतिहासिक नाम चोर बागान ही रह गया।

91 साल पुराना है चोर बागान की दुर्गा पूजा का इतिहास:

चोर बागान सार्वजनिन दुर्गा पूजा की शुरुआत वर्ष 1938 में हुई थी। पिछले 91 वर्षों से भी अधिक समय से यह समिति अपनी समृद्ध सांस्कृतिक परंपरा को संजोए हुए है। उत्तर कोलकाता की संकरी गलियों के बीच स्थित होने के बावजूद,

यह पंडाल हर साल लाखों दर्शनार्थियों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

अपनी अनूठी कलात्मकता, भव्य सजावट और सामाजिक संदेश देने वाली थीम के कारण

यह कोलकाता की सबसे प्रतिष्ठित और ऐतिहासिक बारोवारी यानी सार्वजनिक दुर्गा पूजा में से एक मानी जाती है।

हर साल यहां की नई थीम को देखने के लिए शहर और राज्य भर से लोग पहुंचते हैं।

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