सिर्फ फेफड़े नहीं; दिमाग की नसें भी ब्लॉक कर रहा बढ़ता प्रदूषण, रहें सतर्क

हेल्थ डेस्क। राष्ट्रीय राजधानी में हवा का स्तर एक्यूआई गिरते ही सिर्फ सांस की दिक्कतें ही नहीं बढ़ रहीं, बल्कि स्ट्रोक और ब्रेन अटैक का खतरा भी तेजी से बढ़ रहा है। डॉक्टरों के अनुसार बढ़ता प्रदूषण (Pollution), तनाव और घंटों एक ही जगह बैठकर काम करने की आदत इस खतरे को कई गुना बढ़ा रही है। प्रदूषण के सीजन में अस्पताल की ओपीडी और इमरजेंसी में स्ट्रोक के मरीज अचानक बढ़ जाते हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब 35 से 45 साल के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं।

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आखिर प्रदूषण से कैसे बढ़ता है स्ट्रोक का खतरा?

डॉक्टरों के अनुसार हवा में मौजूद पीएम 2.5 के सूक्ष्म कण फेफड़ों के रास्ते सीधे खून में प्रवेश कर जाते हैं। ये कण नसों में सूजन पैदा करते हैं और प्लेटलेट्स को अधिक चिपचिपा बना देते हैं। इससे खून का थक्का बनने का जोखिम बढ़ जाता है। जब यही थक्का दिमाग की रक्त वाहिका में फंसता है, तो स्ट्रोक हो जाता है।

रिसर्च का दावा:

दिल्ली-शिमला पर हुए एक अध्ययन में 41,436 मरीजों के आंकड़ों से पता चला कि हवा में एक्यूआई के हर 10 पॉइंट बढ़ते ही हृदय रोग की घटनाओं में 1.8 प्रतिशत और पीएम 2.5 बढ़ने से स्ट्रोक के खतरे में वृद्धि देखी गई।

सिटिंग जॉब और तनाव का दोहरा हमला:

आजकल की डेस्क जॉब और शारीरिक गतिविधि न होना स्ट्रोक के जोखिम को और हवा देता है। लगातार घंटों तक कुर्सी पर बैठे रहने से ब्लड सर्कुलेशन धीमा हो जाता है, जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ता है। जब इसमें प्रदूषण का जहरीला असर और मानसिक तनाव जुड़ता है, तो दिमाग की नसें फटने या ब्लॉक होने का खतरा पैदा हो जाता है।

इन शुरुआती लक्षणों को कभी न करें नजरअंदाज:

स्ट्रोक के लक्षण अचानक उभरते हैं। अगर नीचे दिए गए संकेत दिखें, तो बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करें:

  • संतुलन बिगड़ना: चलने या खड़े होने में अचानक लड़खड़ाहट।
  • दृष्टि पर असर: आंखों के आगे धुंधलापन या अचानक दिखना बंद होना।
  • चेहरे का ढलना: चेहरे का एक तरफ लटक जाना या मुस्करा न पाना।
  • अंगों में कमजोरी: हाथ या पैर में अचानक सुन्नपन महसूस होना।
  • बोलने में दिक्कत: शब्द साफ न निकलना या आवाज लड़खड़ाना।

याद रखें गोल्डन आवर: स्ट्रोक के लक्षण दिखने के शुरुआती साढ़े चार घंटे इलाज के लिए सबसे अहम होते हैं। इस दौरान मिला सही इलाज मरीज की जान बचा सकता है।

खुद को और परिवार को कैसे सुरक्षित रखें?

  1. सुबह की सैर से बचें: जब प्रदूषण का स्तर बहुत अधिक हो, तो सुबह-सुबह बाहर टहलने जाने से बचें।
  2. एन-95 मास्क का इस्तेमाल: बाहर निकलते समय हमेशा अच्छी गुणवत्ता का एन-95 मास्क पहनें।
  3. कुर्सी से ब्रेक लें: हर 30 से 40 मिनट में उठकर दो-तीन मिनट के लिए टहलें।
  4. रूटीन हेल्थ चेकअप: अपना ब्लड प्रेशर, शुगर और कोलेस्ट्रॉल नियमित रूप से जांचें।
  5. हेल्दी आदतें: रोजाना सात-आठ घंटे की पूरी नींद लें, खूब पानी पिएं और धूम्रपान से बिल्कुल दूरी बनाएं।

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