राजकीय सम्मान से क्यों हुआ नाना का अंतिम संस्कार, जानें किन्हें देते हैं ऐसे अंतिम विदाई?

डेस्क। बॉलीवुड के वरिष्ठ अभिनेता नाना पाटेकर (Nana Patekar) का पुणे के पास स्थित डोंजे गांव में पूर्ण राजकीय सम्मान (State Funeral) के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इस घटना के बाद देश में राजकीय अंतिम संस्कार से जुड़े नियमों, प्रक्रियाओं और परंपराओं को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

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भारत में राजकीय अंतिम संस्कार किसी भी नागरिक को दिया जाने वाला एक सर्वोच्च आधिकारिक सम्मान है। यह सम्मान देश के उच्च संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्तियों, स्वतंत्रता सेनानियों, सैन्य बलों के वीर जवानों और समाज में असाधारण योगदान देने वाली विशिष्ट हस्तियों को प्रदान किया जाता है।

राजकीय अंतिम संस्कार किसे दिया जाता है?

भारतीय प्रोटोकॉल और नियमों के तहत राजकीय अंतिम संस्कार की श्रेणी में निम्नलिखित लोग शामिल होते हैं:

  • संवैधानिक पदों पर आसीन व्यक्ति:
  • देश के वर्तमान तथा पूर्व राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, उपराष्ट्रपति, केंद्रीय मंत्री, राज्यों के वर्तमान राज्यपाल और मुख्यमंत्री इसके स्वतः हकदार होते हैं।
  • विशिष्ट योगदान देने वाले नागरिक:
  • कला, सिनेमा, साहित्य, विज्ञान, खेल, राजनीति और समाज सेवा जैसे क्षेत्रों में अतुलनीय योगदान देने वाले नागरिकों को भी यह सम्मान दिया जा सकता है।
  • सशस्त्र बल और पुलिस जवान:
  • कर्तव्य पालन के दौरान अपने प्राणों की आहुति देने वाले सेना, अर्धसैनिक बलों और पुलिस के जवानों को सैन्य या राजकीय सम्मान के साथ विदाई दी जाती है।

मशहूर हस्तियों को राजकीय सम्मान देने का फैसला कौन लेता है?

किसी मशहूर हस्ती को केवल उनकी लोकप्रियता या प्रसिद्धि के आधार पर राजकीय अंतिम संस्कार नहीं मिलता।

  • राज्य या केंद्र सरकार का निर्णय:
  • गैर-संवैधानिक पदों वाले व्यक्तियों या कलाकारों के मामले में अंतिम फैसला संबंधित राज्य सरकार या केंद्र सरकार का होता है।
  • योगदान का मूल्यांकन:
  • सरकार व्यक्ति के सामाजिक कार्य, राष्ट्रीय व सांस्कृतिक योगदान और जनसेवा की उपलब्धियों का मूल्यांकन करती है।
  • मुख्यमंत्री का विशेषाधिकार:
  • राज्य स्तर पर मुख्यमंत्री अपने विशेषाधिकार का प्रयोग करते हुए गृह विभाग के परामर्श से राजकीय सम्मान देने की आधिकारिक घोषणा करते हैं।

राजकीय अंतिम संस्कार के दौरान कौन-कौन सी रस्में निभाई जाती हैं?

राजकीय अंतिम संस्कार के दौरान सरकार और प्रशासन द्वारा निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत विशेष आधिकारिक रस्में पूरी की जाती हैं:

  1. पार्थिव शरीर पर राष्ट्रीय ध्वज: मृतक के पार्थिव शरीर या ताबूत को पूरे सम्मान के साथ तिरंगे (राष्ट्रीय ध्वज) में लपेटा जाता है। अंतिम संस्कार या दाह-संस्कार से ठीक पहले तिरंगे को पूरी मर्यादा के साथ हटाकर परिजनों को सौंप दिया जाता है।
  2. गार्ड ऑफ ऑनर (Guard of Honor): पुलिस या सशस्त्र बलों की एक विशेष टुकड़ी मृतक को सलामी देती है और मातमी धुन बजाकर शोक प्रकट करती है।
  3. गन सैल्यूट (21 या 11 तोपों/बंदूकों की सलामी): प्रोटोकॉल और पद की वरिष्ठता के आधार पर पुलिस या सेना के जवान हवा में गोलियां चलाकर औपचारिक गन सैल्यूट देते हैं।
  4. प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति:
  5. सरकार के प्रतिनिधि, पुलिस महानिदेशक, जिलाधिकारी और वरिष्ठ जन प्रतिनिधि राजकीय शोक में शामिल होकर पुष्पांजलि अर्पित करते हैं।

राजकीय शोक और राजकीय अंतिम संस्कार में क्या अंतर है?

कई बार राजकीय अंतिम संस्कार के साथ-साथ राजकीय शोक (State Mourning) की भी घोषणा की जाती है,

लेकिन दोनों में मुख्य अंतर होता है:

  • राजकीय शोक:
  • यह सरकार द्वारा घोषित एक आधिकारिक शोक अवधि होती है।
  • इस दौरान सरकारी इमारतों पर राष्ट्रीय ध्वज को आधा झुका दिया जाता है और सभी आधिकारिक या मनोरंजन कार्यक्रम रद्द कर दिए जाते हैं।
  • राजकीय अंतिम संस्कार:
  • यह केवल अंतिम विदाई के समय दिया जाने वाला सैन्य या पुलिस सम्मान है।
  • जरूरी नहीं कि हर राजकीय अंतिम संस्कार के साथ राजकीय शोक की घोषणा भी की जाए।

संक्षेप में कहें तो राजकीय अंतिम संस्कार केवल एक औपचारिक विदाई नहीं है,

बल्कि यह देश और समाज के प्रति किसी व्यक्ति के निस्वार्थ सेवा, बलिदान और असाधारण योगदान की आधिकारिक राष्ट्रीय स्वीकृति है।

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