सिद्धार्थनगर। सिद्धार्थनगर जिले के डुमरियागंज विकासखंड स्थित बयारा गांव से प्रधानमंत्री ‘हर घर शौचालय योजना’ (scheme) में भारी अनियमितता और धांधली का मामला सामने आया है। आरोप है कि नियमों को दरकिनार कर महज तीन परिवारों के नाम पर 10 शौचालय स्वीकृत कर दिए गए। शिकायतकर्ता ने जिलाधिकारी को शपथ पत्र (हलफनामा) देकर निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने तुरंत जांच टीम का गठन कर दिया है।
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एक ही परिवार के कई सदस्यों के नाम शौचालय स्वीकृत
डुमरियागंज ब्लॉक के बयारा गांव निवासी धर्मवीर गुप्ता ने जिलाधिकारी शिवशरण अप्पा जीएन को शपथ पत्र सौंपकर इस कथित भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया है। शिकायतकर्ता का दावा है कि गांव में नियमों की अनदेखी करते हुए:
- एक ही परिवार को 5 शौचालय स्वीकृत किए गए।
- दूसरे परिवार को 3 शौचालय दिए गए।
- तीसरे परिवार के नाम पर 2 शौचालय आवंटित किए गए।
आरोप के अनुसार, एक ही परिवार के पति-पत्नी, बेटा-बेटी समेत अलग-अलग सदस्यों के नाम दर्ज करके सरकारी धन का दुरुपयोग किया गया है।
कागजों पर निर्माण पूरा, धरातल पर सच कुछ और
शिकायत में यह भी खुलासा हुआ है कि कागजों में स्वीकृत शौचालयों की तुलना में मौके पर बेहद कम निर्माण हुआ है:
- जिस परिवार के नाम पर 5 शौचालय स्वीकृत हैं, वहां मौके पर केवल 2 शौचालय ही बने हैं।
- 3 शौचालय वाले परिवार के पास धरातल पर सिर्फ 1 शौचालय मौजूद है।
- पति-पत्नी के नाम पर स्वीकृत 2 शौचालयों में से मौके पर केवल 1 शौचालय ही तैयार मिला है।
ग्राम प्रधान पर कमीशनखोरी और मिलीभगत का आरोप
शिकायतकर्ताओं ने स्थानीय ग्राम प्रधान और जिम्मेदार अधिकारियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कमीशन के चक्कर में नियमों को ताक पर रखकर एक ही घर में कई-कई शौचालय स्वीकृत किए गए। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

जिलाधिकारी ने दिए जांच के आदेश
मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी शिवशरण अप्पा जीएन ने जांच टीम का गठन कर दिया है।
जिलाधिकारी का बयान: “यह प्रकरण मीडिया और लिखित शिकायत के माध्यम से संज्ञान में आया है। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच के लिए डीसी मनरेगा की अध्यक्षता में एक विशेष टीम गठित कर दी गई है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आवश्यक विधिक कार्रवाई की जाएगी।”
जांच रिपोर्ट पर टिकीं गांव वालों की निगाहें
अब सभी की नजरें प्रशासनिक जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं। जांच टीम मौके पर जाकर लाभार्थियों का भौतिक सत्यापन करेगी, निर्माण की वास्तविक स्थिति परखेगी और सरकारी रिकॉर्ड्स से मिलान करेगी। जांच के बाद ही साफ हो पाएगा कि बयारा गांव में सरकारी योजना में वास्तव में भ्रष्टाचार हुआ है या शिकायत के पीछे कोई राजनीतिक रंजिश है।
(रिपोर्ट- दीप यादव,सिद्धार्थनगर )
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