चुनाव के बाद EVM का क्या होता है, खराब मशीन को कैसे करते हैं नष्ट; देखें नियम

नई दिल्ली। भारत में चुनाव खत्म होने के बाद अक्सर इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (EVM) को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिलती है। कई बार नतीजों को लेकर सवाल उठाए जाते हैं, जिससे आम जनता के मन में यह जिज्ञासा उठती है कि वोटिंग और नतीजों के बाद आखिर इन मशीनों का होता क्या है।

चुनाव आयोग EVM की सुरक्षा और उसके रखरखाव को लेकर बेहद सख्त नियमों का पालन करता है।

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आइए समझते हैं कि

मतदान समाप्त होने से लेकर पुरानी मशीनों को नष्ट करने तक की पूरी प्रक्रिया कैसे काम करती है:

1. वोटिंग के तुरंत बाद स्ट्रॉन्ग रूम में सुरक्षा:

जैसे ही मतदान समाप्त होता है, सभी EVM मशीनों को पोलिंग एजेंटों की मौजूदगी में सील कर दिया जाता है। इसके बाद भारी सुरक्षा घेरे में इन्हें ‘स्ट्रॉन्ग रूम’ तक पहुंचाया जाता है। स्ट्रॉन्ग रूम के आसपास केंद्रीय और राज्य बलों का सख्त पहरा रहता है। इस परिसर में किसी भी तरह के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, फोन या वायरलेस डिवाइस ले जाना पूरी तरह से प्रतिबंधित होता है।

2. नतीजों के बाद 45 दिनों का लॉक-इन पीरियड:

मतगणना पूरी होने और विजेता के नाम का ऐलान होने के बाद भी EVM का काम खत्म नहीं होता। चुनाव नियमों के मुताबिक, नतीजों के खिलाफ अदालत में चुनाव याचिका (Election Petition) दायर करने के लिए 45 दिनों का समय मिलता है। इसलिए, सभी इस्तेमाल हुई मशीनों को उम्मीदवारों के प्रतिनिधियों के सामने दोबारा सील करके 45 दिनों के लिए स्ट्रॉन्ग रूम में बंद रखा जाता है,

ताकि किसी भी कानूनी विवाद की स्थिति में इन्हें सबूत के तौर पर जांचा जा सके।

3. 45 दिन बाद इंजीनियरों द्वारा तकनीकी जांच:

यदि 45 दिनों के भीतर कोई कानूनी चुनौती नहीं मिलती, तो मशीनों को केंद्रीय स्टोरेज रूम में शिफ्ट कर दिया जाता है। वहां Bharat Electronics Limited (BEL) और Electronics Corporation of India Limited (ECIL) के विशेषज्ञ इंजीनियर इनकी बारीकी से जांच करते हैं। जो मशीनें तकनीकी रूप से पूरी तरह सही पाई जाती हैं, उन्हें अगले चुनावों के लिए तैयार मान लिया जाता है।

4. नए चुनाव से पहले मॉक टेस्ट (Mock Poll)

किसी भी नए चुनाव में उपयोग करने से पहले EVM का दोबारा परीक्षण किया जाता है। सभी मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के सामने मॉक पोल (फर्जी मतदान) कराया जाता है। जब सभी दलों के प्रतिनिधि संतुष्ट हो जाते हैं, तब जांच रिपोर्ट पर उनके हस्ताक्षर लिए जाते हैं। इसके अलावा, मतदान वाले दिन किसी खराबी से निपटने के लिए करीब 20 प्रतिशत extra मशीनों को रिजर्व रखा जाता है।

5. खराब या पुरानी EVM को नष्ट करने का नियम:

एक EVM मशीन की औसतन लाइफ लगभग 15 साल होती है।

15 साल पूरे होने या पूरी तरह खराब हो जाने पर इन्हें किसी खुले मैदान में जलाया या फेंका नहीं जाता।

पुरानी और अनुपयोगी मशीनों को वापस BEL या ECIL की फैक्ट्रियों में भेजा जाता है।

वहां ई-वेस्ट (E-Waste) प्रबंधन के सख्त नियमों के तहत

इनके प्लास्टिक पार्ट्स और सर्किट बोर्ड को अलग-अलग करके क्रश (टुकड़े) कर दिया जाता है।

इस पूरी प्रक्रिया की आधिकारिक रिकॉर्डिंग और वीडियोग्राफी भी कराई जाती है।

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