निर्वाचन आयोग के SIR प्रोसेस पर उठे सवाल, कपिल सिब्बल बोल गए ये बात

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सोमवार को पश्चिम बंगाल में टीएमसी के 10 बागी विधायकों की अयोग्यता याचिका पर अहम सुनवाई हुई। इस दौरान राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल (Kapil Sibal) ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच के सामने अपना पक्ष रखा। कपिल सिब्बल ने अदालत से विधानसभा अध्यक्ष (स्पीकर) को अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने के लिए एक तय समय-सीमा (डेडलाइन) जारी करने की मांग की।

यह भी पढ़ें-देश में पहली बार कब हुआ था SIR, जानें क्यों होता है ये जरूरी?

कपिल सिब्बल ने स्पीकरों के रवैये पर उठाए सवाल:

सुनवाई के दौरान कपिल सिब्बल ने कहा कि देश भर में विधानसभा अध्यक्षों द्वारा अयोग्यता याचिकाओं पर जानबूझकर फैसले में देरी की जा रही है।

उन्होंने इसे एक तरह का पैटर्न बताया और कहा कि देरी होने से दल-बदल को बढ़ावा मिलता है।

उन्होंने दलील दी कि तीन महीने की समय-सीमा खत्म होने वाली है,

इसलिए कोर्ट को हस्तक्षेप करके निर्देश जारी करना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी: ‘न्यायपालिका को भी आत्ममंथन की जरूरत’

सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कपिल सिब्बल की इस मांग पर सख्त और संतुलित टिप्पणी की।

कोर्ट ने कहा कि किसी अन्य संवैधानिक संस्था के लिए समय-सीमा तय करने से पहले न्यायपालिका को भी अपने भीतर झांककर देखना चाहिए। बेंच का मानना था कि क्या न्यायपालिका खुद मामलों के निपटारे के लिए तय समय-सीमा का पालन कर पा रही है?

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा:

“हमें दूसरों को निर्देश जारी करने से पहले खुद आईना देखना चाहिए। ऐसे कई मामले हैं, जिनका न्यायपालिका को तेजी से निपटारा करना चाहिए, लेकिन हम भी इसमें कहीं न कहीं चूक रहे हैं।”

क्या है टीएमसी के 10 बागी विधायकों का मामला?

  1. 8 जुलाई को याचिका:
  2. टीएमसी के 10 बागी विधायकों के खिलाफ 8 जुलाई को अयोग्यता याचिका दाखिल की गई थी।
  3. अलग गुट बनाया:
  4. इन विधायकों ने ममता बनर्जी की पार्टी से अलग होकर अपना एक अलग समूह बना लिया है।
  5. 8 अक्टूबर की समय-सीमा:
  6. पश्चिम बंगाल विधानसभा अध्यक्ष के पास अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने के लिए तीन महीने की समय-सीमा 8 अक्टूबर को पूरी हो रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने उम्मीद जताई कि विधानसभा अध्यक्ष पूर्व में तय कानूनी सिद्धांतों (‘केशम मेघचंद्र’ केस के फैसले) का पालन करते हुए अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द और उचित फैसला लेंगे।

Tag: #nextindiatimes #KapilSibal #SIR #ElectionComission

RELATED ARTICLE