बांग्लादेश। बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी ने बड़ा बयान दिया है। यह बयान ‘बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी’ (BNP) का है। संसद में पार्टी के मुख्य सचेतक नूरुल इस्लाम मोनी ने बात रखी। उन्होंने भारत के साथ हुए समझौतों का मुद्दा उठाया।
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उन्होंने संसद के 13वें सत्र में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सरकार सभी समझौतों पर ध्यान दे रही है।
पुराने समझौतों से देश को नुकसान हुआ है। इसलिए अब नए सिरे से कदम उठाए जाएंगे।
सरकार राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना चाहती है। इसी वजह से यह समीक्षा शुरू की गई है।
उन्होंने बताया कि सरकार भारत के साथ हुए 101 समझौतों की समीक्षा कर रही है। यह बयान संसद के 13वें सत्र के दौरान मीडिया सेंटर में दिया गया।
अनैतिक समझौतों को रद्द करने की तैयारी:
पत्रकारों ने चट्टोग्राम और मोंगला बंदरगाहों के इस्तेमाल पर सवाल पूछा। उन्होंने पूछा कि क्या मित्र देशों के साथ हुए समझौतों को रद्द किया जाएगा।
इस पर मोनी ने साफ कहा कि सभी 101 समझौतों (MoUs) की जांच जारी है। इसका नतीजा बहुत जल्द सामने आएगा।
- राष्ट्रीय हित प्राथमिकता: मोनी ने कहा कि मौजूदा सरकार देश के हित को सबसे ऊपर रख रही है।
- पुरानी नीतियों में बदलाव: पिछली सरकार के समय कई अनुचित समझौते हुए थे।
- बंदरगाह नीतियां: पुरानी नीति में स्थानीय जहाजों के बजाय विदेशी जहाजों को तवज्जो दी गई थी।
- संप्रभुता की रक्षा: भविष्य के सभी कूटनीतिक संबंध देश की संप्रभुता और अंदरूनी हितों पर आधारित होंगे।
BRICS समिट में न बुलाने पर जताई नाराजगी:
बांग्लादेश के अखबार ‘द डेली ऑब्जर्वर’ ने यह खबर छापी है। उन्होंने इसे प्रमुखता से दिखाया है। मोनी ने दिल्ली में चल रहे ब्रिक्स सम्मेलन पर बात की। उन्होंने भारत में आयोजित इस बैठक का जिक्र किया।
उन्होंने प्रधानमंत्री तारिक रहमान को ब्रिक्स में न बुलाने पर नाराजगी जताई। उन्होंने इसे देश के लिए बहुत निराशाजनक बताया।
भारत-बांग्लादेश संबंधों पर पड़ेगा असर:
बांग्लादेश के इस कदम से दोनों देशों के रिश्तों में तनाव बढ़ेगा।
समझौते रद्द होने से भारत के व्यापार पर बुरा असर पड़ेगा। इससे भारत के लिए रणनीतिक चुनौतियां भी खड़ी होंगी।
बांग्लादेश जल्द ही इस समीक्षा का अंतिम फैसला सार्वजनिक करने जा रहा है।



