नई दिल्ली। IAS अधिकारी तुकाराम मुंडे (Tukaram Mundhe) इन दिनों अपने सख्त एक्शन को लेकर चर्चा में बने हुए हैं। वे इस समय महाराष्ट्र फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन के कमिश्नर के पद पर हैं। तुकाराम मुंडे और उनकी टीम महाराष्ट्र में अब तक कई फूड आउटलेट पर छापेमारी कर चुकी है। हालांकि, तुकाराम मुंडे का कहना है कि जब तक राज्य में हर किसी को सुरक्षित खाना और दवाएं नहीं मिल जातीं, तब तक वे पीछे नहीं हटेंगे।
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तुकाराम मुंडे एक ऐसे अधिकारी हैं, जिनका 21 साल की सर्विस में 25 बार ट्रांसफर हुआ है और वे अपनी किसी भी पोस्टिंग में अब तक पूरा कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए हैं। आम तौर पर एक IAS ऑफिसर किसी पोस्टिंग पर लगभग तीन साल का कार्यकाल पूरा करता है, जबकि तुकाराम मुंडे का बार-बार ट्रांसफर होता रहा है और कई बार उन्हें बिना किसी पोस्टिंग के भी रखा गया है।

महाराष्ट्र के मराठवाड़ा इलाके के बीड जिले में एक गरीब किसान परिवार में तुकाराम मुंडे का जन्म हुआ था। खेती-बाड़ी की मुश्किलों और कर्ज का बोझ हमेशा ही उनके जीवन में बना रहा। वे अपने परिवार के साथ खेत में काम करते थे और साप्ताहिक बाजार में सब्जियां बेचने जाया करते थे। वे रोजाना रात में 2 बजे उठकर हाथों से फसलों में पानी देते थे। IAS अधिकारी का कहना है कि उन्होंने अपने परिवार को सिस्टम की वजह से परेशानियां झेलते देखा और इसी बात ने उन्हें प्रशासनिक सेवा में आने के लिए प्रेरित किया।
तुकाराम मुंडे ने बिना किसी कोचिंग अकादमी, बिना किसी नेटवर्क और बिना किसी पारिवारिक बैकग्राउंड के 2005 में UPSC परीक्षा पास की और राष्ट्रीय स्तर पर 20वीं रैंक हासिल की। उन्हें महाराष्ट्र का होम कैडर मिला। तुकाराम मुंडे ने 1996 में औरंगाबाद (अब छत्रपति संभाजीनगर) के गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ आर्ट्स एंड साइंस से अपनी बैचलर डिग्री पूरी की। उन्होंने 1998 में डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी से पॉलिटिकल साइंस में MA किया।
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