नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के वरिष्ठ नेता जॉर्ज कुरियन (George Kurian) ने मंगलवार को अल्पसंख्यक मामलों और मत्स्य पालन राज्य मंत्री (MoS) के पद से इस्तीफा दे दिया। उनका छह साल का राज्यसभा कार्यकाल पूरा हो गया था। कुरियन शायद केंद्र सरकार में एकमात्र ऐसे मंत्री थे जो ईसाई समुदाय से आते हैं। उनका राज्यसभा कार्यकाल 21 जून को समाप्त हुआ है।
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बता दें कि 65 साल के कुरियन केरल के कोट्टायम से हैं और पहले इस दक्षिणी राज्य में बीजेपी यूनिट के उपाध्यक्ष रह चुके हैं। पेशे से वकील कुरियन टीवी डिबेट्स में एक जाना-माना चेहरा रहे हैं। उन्हें अक्सर प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के केरल दौरों के दौरान उनके भाषणों का मलयालम में अनुवाद करते हुए देखा जाता था।
उन्हें 2024 में केंद्रीय कैबिनेट में शामिल किया गया था। इस कदम को केरल में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए ईसाई समुदाय तक पहुंचने की बीजेपी की कोशिश के तौर पर देखा गया था। कुरियन केरल के सबसे प्रमुख ईसाई चर्चों में से एक सिरो-मालाबार कैथोलिक चर्च से जुड़े हैं। वे 1980 में बीजेपी के गठन के समय से ही पार्टी के साथ हैं और इससे पहले राज्य महासचिव, भारतीय युवा मोर्चा के राष्ट्रीय सचिव और पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य के तौर पर काम कर चुके हैं।

2016 के केरल चुनावों में कुरियन ने पुथुपल्ली सीट से तत्कालीन मुख्यमंत्री और कांग्रेस उम्मीदवार ओमन चांडी के खिलाफ चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें हार का सामना करना पड़ा। उन्होंने बीजेपी के वरिष्ठ नेता ओ. राजगोपाल के ‘ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी’ (OSD) के तौर पर भी काम किया था, जब राजगोपाल 1999 से 2004 तक वाजपेयी सरकार में केंद्रीय मंत्री थे।
कुरियन मध्य प्रदेश से राज्यसभा सांसद थे। इस बार बीजेपी ने इस राज्य से तरुण चुघ और रजनीश अग्रवाल को उच्च सदन के लिए नामित किया। कहा जा रहा है कि केरल विधानसभा चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन के कारण उन्हें दोबारा नॉमिनेट नहीं किया गया।
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