39.6 C
Lucknow
मंगलवार, जून 23, 2026

Lucknow Fire: किसी भी हादसे के बाद कैसे तय होता है मुआवजा? जानें नियम

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ (Lucknow) में आज सोमवार दोपहर को अलीगंज पुरनिया स्थित एक कोचिंग सेंटर में लगी आग में 15 मासूम बच्चों की मौत हो गई है जबकि चार लोग इस हादसे में गंभीर रूप से घायल हैं। इस दर्दनाक घटना पर गहरा शोक जताते हुए पीएम मोदी ने मृतकों के आश्रितों को 2-2 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की तत्कालिक आर्थिक सहायता राशि देने की घोषणा की है।

यह भी पढ़ें-बिजली केबल के सहारे, खिड़की से छलांग…,डरा देंगी लखनऊ अग्निकांड की Photos

सरकार के इस कदम के बाद अक्सर लोगों के मन में यह ख्याल आता है कि किसी भी हादसे के बाद सरकार मुआवजे की यह रकम आखिर कैसे तय करती है?

सड़क हादसे:

अगर किसी शख्स की सड़क दुर्घटना में मौत हो जाती है या फिर वह गंभीर रूप से घायल हो जाता है तो मुआवजे का निर्धारण मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण द्वारा किया जाता है। इसके तहत कोई एक निश्चित रकम फिक्स नहीं होती है बल्कि इसके लिए मल्टीप्लायर मेथड यानि गुणांक विधि का इस्तेमाल किया जाता है।

इसके तहत अदालत पीड़ित की उम्र, उसी मासिक आमदनी और उसके ऊपर निर्भर परिवार के सदस्यों की संख्या को देखती है। इसके अलावा अस्पताल के बिल, शारीरिक व मानसिक कष्टों की भरपाई भी इसमें शामिल होती है। सड़क पर कई बार ऐसे हादसे भी होते हैं, जहां टक्कर मारने वाला वाहन चालक मौके से गाड़ी लेकर फरार हो जाता है और लाख कोशिशों के बाद भी उसकी पहचान नहीं हो पाती है। ऐसे गंभीर मामलों को कानून हिट-एंड-रन केस कहा जाता है।

हिट-एंड-रन मामले:

इस स्थिति में पीड़ित परिवार को बेसहारा नहीं छोड़ा जाता है। केंद्र सरकार की एक विशेष हिट-एंड-रन मोटर दुर्घटना मुआवजा योजना के तहत मोटर वाहन दुर्घटना कोष से सीधे तौर पर एक निश्चित आर्थिक सहायता दी जाती है। इस नियम के अनुसार अगर किसी अज्ञात वाहन की वजह से किसी शख्स की मौत हो जाती है तो उसके आश्रितों को दो लाख रुपये और गंभीर रूप से घायल होने की स्थिति में पीड़ित को 50,000 रुपये की पक्की सरकारी राहत दी जाती है।

ट्रेन हादसे:

ट्रेन दुर्घटनाओं या रेलवे परिसर के भीतर होने वाली किसी भी अप्रिय घटना में मुआवजे की व्यवस्था पूरी तरह से रेलवे अधिनियम 1989 के दायरे में आती है। इसके लिए पीड़ियों को रेलवे दावा न्यायाधिकरण में बाकायदा आवेदन करना होता है। वर्तमान नियमों की मानें तो अगर किसी रेल हादसे में किसी यात्री की जान चली जाती है या फिर वह पूरी तरह से विकलांग हो जाता है, तो रेलवे प्रशासन की तरफ से उसके परिजनों को आठ लाख रुपये का एक निश्चित मुआवजा दिया जाता है।

विमान हादसे:

हवाई जहाज के हादसों में मुआवजे का नियम सबसे अलग और बेहद सख्त होता है। भारतीय विमानन क्षेत्र में यह व्यवस्था कैरिएज बाई एयर एक्ट 1972 और अंतरराष्ट्रीय मॉन्ट्रियल कन्वेंशन के तहत संचालित होती है। इसकी गणना अंतरराष्ट्रीय मुद्रा एसडीआर में की जाती है। इस नियम के तहत स्ट्रिक्ट लायबिलिटी का सिद्धांत काम करता है, जिसके अनुसार एयरलाइन कंपनी की गलती हो या न हो, विमान हादसे में मौत या गंभीर चोट पर कंपनी प्रति यात्री लगभग 1.4 करोड़ से 1.5 करोड़ रुपये देने के लिए कानूनी तौर पर बाध्य है।

Tag: #nextindiatimes #LucknowFire #Lucknow

RELATED ARTICLE