लाइफस्टाइल डेस्क। वेट लॉस (weight loss) जर्नी में अक्सर हम जिस चीज को सबसे पहले अपनी डाइट से बाहर करते हैं, वह है कार्बोहाइड्रेट और उसमें भी सबसे पहला नंबर आता है हमारे मनपसंद सफेद चावल का। कहा जाता है कि अगर छरहरी काया पानी है, तो सफेद चावल से दूरी बना लें और उसकी जगह ब्राउन राइस को अपनी थाली में शामिल करें। क्या वजन घटाने का यह फॉर्मूला वैज्ञानिक रूप से पूरी तरह सही है; चलिए जानें।
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मेडिकल साइंस के अनुसार, इन दोनों चावलों में सबसे बड़ा अंतर इनकी प्रोसेसिंग का होता है। जब खेत से धान आता है, तो ब्राउन राइस में उसकी बाहरी परतें- ब्रान और जर्म बरकरार रहती हैं। ब्रान में जहां खूब सारा फाइबर होता है, वहीं जर्म विटामिंस और मिनरल्स का खजाना है। जब इसी ब्राउन राइस को मशीनों में डालकर पॉलिश किया जाता है, तो ये दोनों पौष्टिक परतें हट जाती हैं। इसके बाद जो सफेद हिस्सा बचता है, उसे ही हम ‘सफेद चावल’ कहते हैं।

डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि वजन घटाने के लिए सबसे जरूरी नियम कैलोरी डेफिसिट है। अगर कैलोरी की बात करें, तो एक कटोरी सफेद चावल और ब्राउन राइस के बीच का अंतर बहुत ही मामूली, लगभग 10-20 कैलोरी होता है। इसलिए, केवल ब्राउन राइस खाना शुरू कर देने से आपका वजन रातों-रात कम नहीं हो जाएगा।
डॉक्टर की सलाह यह है कि चावल को अकेला खाने के बजाय उसे ‘कंट्रोल’ करें। अगर आप सफेद चावल को ढेर सारी हरी सब्जियों और दाल या प्रोटीन के साथ मिलाकर खाते हैं, तो आपकी पूरी मील का ग्लाइसेमिक इंडेक्स खुद-ब-खुद कम हो जाता है। यह शानदार कॉम्बिनेशन आपके मेटाबॉलिज्म को दुरुस्त रखता है।
इसके अलावा, सफेद चावल की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इसे पचाना बेहद आसान होता है। जिन लोगों को अक्सर गैस, ब्लोटिंग या पाचन की समस्या रहती है, उनके लिए ब्राउन राइस का भारी फाइबर पचाना कई बार मुश्किल हो सकता है।
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