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सोमवार, जून 22, 2026

UN में पाकिस्तान को करारा जवाब देने वाली अनुपमा सिंह कौन हैं? इतनी मिलती है सैलरी

नई दिल्ली। संयुक्त राष्ट्र के अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की एक जांबाज महिला अधिकारी ने पाकिस्तान के झूठ और प्रोपेगैंडा की ऐसी धज्जियां उड़ाई हैं, जिसकी गूंज पूरी दुनिया में सुनाई जा रही है। जिनेवा में आयोजित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की बैठक में भारतीय राजनायिक Anupama Singh ने पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को अपनी तीखी और बेबाक टिप्पणियों इस कदर बेनकाब किया है कि वह जवाब देने की भी हालत में नहीं है।

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इस ऐतिहासिक भाषण के बाद से हर भारतीय के मन में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर अनुपमा सिंह का बैकग्राउंड क्या है और सरकार की ओर से उनको कितनी सैलरी मिलती है? जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 62वें सत्र के दौरान भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव अनुपमा सिंह ने पाकिस्तान को जमकर लताड़ लगाई। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि पाकिस्तान आज खुद के ही तैयार किए हुए आतंकवाद के जहरीले ढांचे का शिकार बन चुका है। कश्मीर का रोना रोने वाले पाकिस्तान के हर झूठ को उन्होंने भरी सभा में ऐसे तर्कों के साथ काटा कि पाकिस्तानी प्रतिनिधियों को जवाब देते नहीं बना।

अनुपमा सिंह साल 2014 बैच की एक होनहार और सीनियर भारतीय विदेश सेवा अधिकारी हैं। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि बेहद शानदार है, जिसने उनको एक बेहतरीन रणनीतिकार बनाया है। उन्होंने देश के प्रतिष्ठित संस्थान मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से कंप्यूटर साइंस में बीटेक की डिग्री हासिल की है। इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के मशहूर फैकल्टी ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज FMS से फाइनेंस में एमबीए भी किया। डिप्लोमैट बनने से पहले उन्होंने मशहूर ग्लोबल कंसल्टिंग फर्म केपीएमजी में एक कंसल्टेंट के रूप में सेवाएं भी दी थीं।

मिलती है इतनी सैलरी:

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व करने वाली अनुपमा सिंह जैसी सीनियर डिप्लोमैट की सटीक मासिक सैलरी को सुरक्षा कारणों के चलते पब्लिकली नहीं बताया जाता है। हालांकि सरकार के सातवें वेतन आयोग के नियमों के अनुसार एक आईएफएस अधिकारी का वेतन उनकी वरिष्ठता के आधार पर तय किया जाता है। शुरुआत में तो इनकी सैलरी पे-बैंड के अनुसार होती है, जो कि प्रमोशन के साथ-साथ बढ़ती जाती है लेकिन विदेशों में तैनात राजनयिकों की असल ताकत सैलरी से ज्यादा उनको मिलने वालों भत्तों पर निर्भर करती है।

जिनेवा जैसे महंगे शहर में तैनात संयुक्त राष्ट्र के फर्स्ट सेक्रेटरी को भारत सरकार की ओर से फॉरेन अलाउंस दिया जाता है। यह भत्ता उस देश में रहने की लागत के अनुसार तय होता है। इस भत्ते को मिलाकर उनकी कुल आय लाखों में पहुंच जाती है। सैलरी के साथ-साथ उनको मुफ्त आलीशान आवास, आधिकारिक वाहन, पर्सनल ड्राइवर, बेहतरीन मेडिकल सुविधाएं और बच्चों की पढ़ाई के लिए खास अंतरराष्ट्रीय शिक्षा भत्ता भी मिलता है।

Tag: #nextindiatimes #AnupamaSingh #UN

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