डेस्क। ईरान और अमेरिका के बीच शुरू हुई यह जंग (Iran-US War) अब केवल सैन्य टकराव तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि यह दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा संकट बन चुकी है। फरवरी 2026 के अंत से शुरू हुए इस संघर्ष में जिस तरह से हथियारों और संसाधनों का इस्तेमाल हो रहा है, उसने पूरी दुनिया को हैरान कर दिया है।
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हालिया रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि इस जंग में अमेरिका ने अब तक 30 अरब डॉलर से अधिक की राशि खर्च कर दी है। यह खर्च किसी भी देश की अर्थव्यवस्था को हिला देने के लिए काफी है और इसका असर वैश्विक स्तर पर महसूस किया जा रहा है। अमेरिका के लिए इस जंग का हर एक दिन बेहद महंगा साबित हो रहा है। अमेरिका हर दिन लगभग 890 मिलियन डॉलर से लेकर 2 अरब डॉलर तक पानी की तरह बहा रहा है।

ईरान के खर्चों का कोई औपचारिक आर्थिक आंकड़ा सार्वजनिक नहीं है लेकिन सैन्य गतिविधियों के आधार पर यह स्पष्ट है कि ईरान भी अपने संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा इस जंग में झोंक चुका है। मार्च की शुरुआत तक ईरान ने लगभग 2,500 ड्रोन और मिसाइलें दागकर अपनी आक्रामकता दिखाई थी। ईरान की एयर डिफेंस सिस्टम को भारी नुकसान उठाना पड़ा है और कई महत्वपूर्ण सैन्य बुनियादी ढांचे नष्ट हो गए हैं।
दोनों देशों के बीच का यह आर्थिक खिंचाव केवल उनके अपने खजाने तक सीमित नहीं है। जैसे-जैसे जंग का समय आगे बढ़ रहा है, पूरी दुनिया पर इसका असर स्पष्ट दिखने लगा है। अमेरिका जिस तरह से प्रतिदिन अरबों डॉलर का खर्च कर रहा है, वह उसके राजकोषीय घाटे और वैश्विक मुद्रा स्थिरता को भी प्रभावित कर सकता है।
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