महाराष्ट्र। नागपुर के रहने वाले एक स्टूडेंट को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी यानी NTA ने NEET री-एग्जाम का सेंटर अबूधाबी में दिया है। महाराष्ट्र का यह छात्र अब नीट परीक्षा नहीं देना चाहता। एडमिट कार्ड डाउनलोड करने के बाद वह पूरी रात रोया। एजेंसी की लापरवाही से टूट चुका है। पिता दिलासा भी नहीं दे पा रहे हैं। अब इस मामले में लोकसभा में नेता विपक्ष राहुल गांधी का रिएक्शन भी सामने आया है।
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NEET की तैयारी कर रहे महाराष्ट्र, नागपुर के अब्दुल्ला मोहम्मद तालिब के परिवार का दावा है कि 21 जून को होने वाले NEET-UG री-एग्जाम के लिए उन्हें अबू धाबी का एक स्कूल एग्जाम सेंटर के तौर पर मिला है। परिवार का कहना है कि फॉर्म में सिर्फ तीन जिलों का विकल्प भरा था। अबू धाबी का कोई ऑप्शन नहीं चुना था।
NTA का आया ये जवाब:
छात्र के पिता ने बताया, ‘कल शाम 4 बजे एडमिट कार्ड डाउनलोड करने पर हमें पता चला कि सेंटर अबू धाबी का एक स्कूल है। हम हैरान रह गए क्योंकि हमने ऐसा कोई ऑप्शन नहीं चुना था। हमने हेल्पलाइन नंबर पर कॉल किया। उन्होंने हमें मेल भेजने के लिए कहा। मेल भेजने के बाद हमें कॉल आया कि शनिवार शाम 4 बजे तक हमें नया एडमिट कार्ड जारी कर दिया जाएगा। हमने ऑप्शन के तौर पर 3 जिले चुने थे।’

एनटीए ने लिखा, ‘शिकायत पर कार्रवाई की जा रही है और जरूरी जांच-पड़ताल के बाद, अगले कुछ घंटों में उम्मीदवार को नागपुर में एक सेंटर अलॉट कर दिया जाएगा। उधर राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा, ‘नागपुर का एक बच्चा एक महीने से NEET re-exam की तैयारी कर रहा था। कल परीक्षा से ठीक एक दिन पहले उसने एडमिट कार्ड डाउनलोड किया। उसका सेंटर निकला-अबू धाबी।’ उन्होंने कहा कि न तो छात्र के पास पासपोर्ट है और न परिवार के पास विदेश भेजने के पैसे और न ही अब कोई वक़्त बचा है। वो रात भर रोता रहा और परीक्षा देने से ही मना कर रहा है – क्या इस तनाव की कल्पना भी की जा सकती है?
राहुल गांधी ने सवाल पूछा, ‘आखिर ऐसा हुआ भी कैसे? कल किसी भी छात्र को सेंटर तक न पहुंच पाने की शिकायत नहीं होनी चाहिए। NTA असल में देश के बच्चों और उनके माता-पिता का सिर्फ़ धीरज टेस्ट कर रही है। जो सिस्टम एक बच्चे को अपने ही शहर में एक सेंटर नहीं दे सकती, उल्टा विदेश भेज सकती है – उसे परीक्षा करवाने का कोई हक़ नहीं। ‘
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