नई दिल्ली। हाल ही में मुख्यमंत्री भगवंत मान ने पंजाब विधानसभा के एक विशेष सत्र के दौरान विश्वास प्रस्ताव पेश किया। साथ ही यह पारित भी हो गया है। अब पंजाब सरकार अगले 6 महीनों तक अविश्वास प्रस्ताव के जरिए गिराए जाने से सुरक्षित हो गई है। इसी बीच आइए जानते हैं कि इसे लेकर क्या नियम हैं?
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भारतीय संविधान के अनुच्छेद 164 के तहत मंत्री परिषद सामूहिक रूप से विधानसभा के प्रति उत्तरदायी होता है। इसका मतलब है कि सत्ता में बने रहने के लिए सरकार को हमेशा सदन का विश्वास प्राप्त होना चाहिए। हालांकि दिलचस्प बात यह है कि संविधान में विश्वास प्रस्ताव या फिर अविश्वास प्रस्ताव जैसे शब्दों का साफ तौर पर कोई भी उल्लेख नहीं है। इसके बजाय यह प्रक्रिया हर विधानसभा के नियमों द्वारा संचालित की जाती है।

जब भी कोई सरकार Confidence Motion लाती है और उसे जीत लेती है तो यह अनिवार्य रूप से साबित हो जाता है कि उसके पास सदन में जरूरी बहुमत है। यह राजनीतिक स्थिरता का एक औपचारिक प्रदर्शन होता है, जो इस बात को दर्शाता है कि सत्ताधारी दल या फिर गठबंधन के पास बिना किसी तत्काल खतरे के शासन जारी रखने के लिए पूरा समर्थन है।
6 महीने की यह पाबंदी शासन में स्थिरता को सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। ऐसे नियम के बिना सरकार को लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है। इस वजह से उनके लिए प्रभावी ढंग से काम करना मुश्किल हो जाएगा। एक बार जब कोई सरकार विश्वास प्रस्ताव के जरिए अपना बहुमत साबित कर देती है तो राज्यपाल आमतौर पर उस 6 महीने के अंदर उसे दोबारा अपनी ताकत साबित करने के लिए नहीं कह सकते हैं।
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