डेस्क। ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण तनाव के बीच एक बड़ी खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान खींचा है। इस्फहान के पास एक अमेरिकी रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान C-130 हरक्यूलिस विमान के तबाह होने की जानकारी सामने आई है। यह कोई साधारण मालवाहक विमान नहीं है, बल्कि अमेरिकी सैन्य शक्ति का वो वर्कहॉर्स है, जिसने दशकों तक दुर्गम युद्ध क्षेत्रों में अपनी बादशाहत कायम रखी है।
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ईरानी मीडिया का दावा है कि उन्होंने इस विमान को निशाना बनाया है। यह घटना उस समय हुई जब यह विमान एक बेहद संवेदनशील रेस्क्यू ऑपरेशन का हिस्सा था। अमेरिका के लिए C-130 Aircraft सिर्फ एक मशीन नहीं, बल्कि उसकी रसद सप्लाई चेन की रीढ़ की हड्डी माना जाता है।
ज्यादातर आधुनिक सैन्य विमानों को उतरने के लिए लंबे और पक्के रनवे की जरूरत होती है, लेकिन C-130 की ताकत इसके बिल्कुल उलट है। यह विमान मिट्टी, घास, बर्फ या पत्थर वाली कच्ची और छोटी हवाई पट्टियों पर भी सुरक्षित लैंडिंग और टेक-ऑफ कर सकता है।इसीलिए इसे सीधे युद्ध के मैदान में सैनिकों और हथियारों को उतारने के लिए भेजा जाता है। दुर्गम पहाड़ों या रेतीले इलाकों में जहां दूसरे विमान हार मान जाते हैं, वहां हरक्यूलिस शान से उतरता है।

C-130 विमान की माल ढोने की क्षमता हैरान करने वाली है। यह एक बार में लगभग 19 से 20 टन तक का भारी सैन्य सामान, वाहन या मशीनें ले जा सकता है। एक ही मिशन में इसमें 92 सशस्त्र सैनिक या 64 पैराट्रूपर्स (पैराशूटधारी सैनिक) बैठ सकते हैं। रसद पहुंचाने से लेकर घायल सैनिकों की मेडिकल निकासी तक, यह विमान हर तरह की चुनौती के लिए बना है और इसी वजह से अमेरिकी सेना का भरोसा इस पर गहरा है।
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