डेस्क। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर हाल ही में जो चेतावनी दी है उससे अंतरराष्ट्रीय व्यापार में हलचल मच गई है और कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ गई हैं। क्रूड ऑयल 106 डॉलर प्रति बैरल के निशान को पार कर चुका है। इससे महंगाई और दुनिया भर में आर्थिक मंदी की आशंकाएं बन गई हैं। आईये जानते हैं इतिहास में कब-कब ऐसी नौबत आ चुकी है?
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Economic Recession की शुरुआत 1929 में संयुक्त राज्य अमेरिका में हुई थी और यह तेजी से पूरी दुनिया में फैल गई। इसका सबसे बड़ा मोड़ 29 अक्टूबर 1929 को आया। इस दिन अमेरिका का शेयर बाजार बुरी तरह से गिर गया। इसके बाद कुछ ही घंटे में अरबों डॉलर डूब गए और निवेशकों में घबराहट फैल गई। जल्द ही यह एक बड़े आर्थिक संकट में बदल गया। यह आर्थिक संकट एक दशक तक चला।

जर्मनी में हालात और भी ज्यादा खराब थे। वहां भारी बेरोजगारी और गरीबी की वजह से देश भर में अशांति फैल गई। ब्रिटेन को अपने एक्सपोर्ट में भारी गिरावट का सामना करना पड़ा। ऐसा इसलिए क्योंकि दुनिया भर में उत्पादों की मांग पूरी तरह से खत्म हो गई थी। कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे देश मुख्य रूप से कृषि उत्पादों और कच्चे माल के एक्सपोर्ट पर निर्भर थे।
जब दुनिया भर में इन चीजों की कीमतें 60% तक गिर गई तो इन देशों की अर्थव्यवस्था को भी भारी नुकसान उठाना पड़ा। भारत उस वक्त ब्रिटिश शासन के अधीन था। इसका असर मुख्य रूप से ग्रामीण इलाकों में महसूस किया गया। वैश्विक मांग घटने की वजह से एक्सपोर्ट में भारी गिरावट आई और किसानों को अपनी फसलों के लिए काफी कम कीमत दी गई।
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