इजरायल के स्वतंत्रता दिवस पर क्यों जलती हैं 12 मशालें, जानें इस परंपरा का अनोखा इतिहास

इजरायल। इजरायल (Israel) के स्वतंत्रता दिवस समारोह का निमंत्रण इस बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काफी चर्चा में है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्लाईदुबई के साहसी भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छार को इस ऐतिहासिक समारोह में शामिल होने का विशेष न्योता भेजा है। इजरायल में आजादी के जश्न की शुरुआत ‘सेलेब्रिटी लाइटिंग ऑफ फ्लेम’ नाम के एक विशेष दीपोत्सव कार्यक्रम से होती है, जिसे वहां का सबसे बड़ा राष्ट्रीय सम्मान माना जाता है।

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यह राष्ट्रीय पर्व केवल राजनीतिक आजादी का दिन नहीं है, बल्कि यह यहूदी समुदाय के दो हजार साल पुराने लंबे संघर्ष और उनकी समृद्ध सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ा एक बेहद पवित्र आयोजन है।

हिब्रू पंचांग के अनुसार तय होती है आजादी की तारीख:

ब्रिटिश शासन के समाप्त होते ही पूर्व प्रधानमंत्री डेविड बेन गुरियन ने 14 मई 1948 को तेल अवीव शहर से इजरायल राष्ट्र के गठन का आधिकारिक एलान किया था। हालांकि, इजरायल अपनी आजादी का जश्न अंग्रेजी कैलेंडर के बजाय हिब्रू पंचांग की ‘5 इयार’ तिथि के अनुसार मनाता है। इसी वजह से अंतरराष्ट्रीय कैलेंडर में हर साल इजरायल के स्वतंत्रता दिवस की तारीख बदलती रहती है। उदाहरण के लिए, वर्ष 2026 में यह पर्व 21 अप्रैल को मनाया गया, जबकि 2027 में यह 11 मई और 2028 में 1 मई को आयोजित होगा।

कैसे हुआ आधुनिक इजरायल का गठन?

आधुनिक इजरायल बनने से पहले यह पूरा क्षेत्र ‘ब्रिटिश मैंडेट फॉर फिलिस्तीन’ के रूप में जाना जाता था और इस पर अंग्रेजों का नियंत्रण था। 19वीं और 20वीं सदी में जब दुनिया भर में यहूदी समुदाय पर अत्याचार बढ़ने लगे, तो एक अलग यहूदी देश की स्थापना के लिए जायोनिस्ट आंदोलन की शुरुआत हुई। द्वितीय विश्व युद्ध और नाजी होलोकॉस्ट के भीषण संकट के बाद संयुक्त राष्ट्र ने इस इलाके को अरब और यहूदी दो अलग राज्यों में विभाजित करने का प्रस्ताव दिया। यहूदी इस विभाजन पर सहमत हो गए थे, लेकिन अरब देशों के विरोध के कारण इजरायल के गठन की घोषणा होते ही पहला अरब-इजरायल युद्ध शुरू हो गया था।

माउंट हर्जल पर 12 मशालें जलाने की गौरवशाली परंपरा:

इजरायल के स्वतंत्रता दिवस की भव्य शुरुआत येरुशलम स्थित माउंट हर्जल पर 12 प्रतीकात्मक मशालें जलाकर की जाती है। वर्ष 1950 में शुरू हुई इस गौरवशाली परंपरा को हाल ही में 76 वर्ष पूरे हो चुके हैं। यह समारोह ‘योम हाजिकारोन’ यानी देश के शहीदों और आतंकवादी हमलों में मारे गए निर्दोष नागरिकों के स्मारक दिवस के समापन और आजादी के नए उत्साह की शुरुआत का प्रतीक है।

इस खास समारोह से जुड़ी कुछ प्रमुख बातें:

  • 12 जनजातियों का प्रतीक:
  • जलाई जाने वाली 12 मशालें प्राचीन इजरायल की 12 ऐतिहासिक जनजातियों का प्रतिनिधित्व करती हैं,
  • जो देश की अटूट राष्ट्रीय एकता को दर्शाती हैं।
  • विशेष नागरिकों का चयन:
  • इस राष्ट्रीय मंच पर मशाल जलाने का अवसर केवल उन्हीं व्यक्तियों को मिलता है,
  • जिन्होंने समाज, शिक्षा, संस्कृति या मानवीय सेवा के क्षेत्र में असाधारण योगदान दिया हो।
  • उच्चतम सम्मान:
  • नामांकित नागरिक एक-एक करके मंच पर आकर देश के नाम अपना संदेश देते हैं और मशाल प्रज्ज्वलित करते हैं।
  • इस पवित्र आयोजन में किसी विदेशी नागरिक या वैश्विक नेता को आमंत्रित करना इजरायल का सर्वोच्च कूटनीतिक और नागरिक सम्मान माना जाता है।

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