विजयादशमी पर प्रसिद्ध मां वटवासिनी महाकाली धाम में भव्य आयोजन, सपा नेता ने 51 कन्याओं का किया पूजन

सिद्धार्थनगर। जिले के प्रसिद्ध मां वटवासिनी महाकाली गालापुर धाम में विजयादशमी (Vijayadashami) के पावन पर्व पर भक्ति और आस्था का अनोखा संगम देखने को मिला। मां काली के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। इस अवसर पर समाजवादी पार्टी के नेता रज्जन पांडेय की अगुवाई में एक भव्य धार्मिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया, जिसमें क्षेत्रवासियों और दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

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51 कन्याओं का पूजन और फलाहार वितरण:

कार्यक्रम की शुरुआत 51 कन्याओं के विधि-विधान से पूजन के साथ हुई।

  • धार्मिक अनुष्ठान: सपा नेता रज्जन पांडेय और अन्य अतिथियों ने कन्याओं के पांव पखारकर उनका आशीर्वाद लिया।
  • फलाहार का आयोजन: पूजा-अर्चना के बाद धाम में मौजूद सभी श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों के लिए फलाहार का प्रबंध किया गया।
  • सत्य की विजय का संदेश: रज्जन पांडेय ने गालापुर धाम के पवित्र वटवृक्ष और मां काली की महिमा का उल्लेख करते हुए कहा कि विजयादशमी असत्य पर सत्य की जीत का प्रतीक है। माता रानी का आशीर्वाद रहा तो सत्य की विजय निश्चित है।

धार्मिक मंच से उठे क्षेत्र के बुनियादी मुद्दे:

इस आयोजन में डुमरियागंज लोकसभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी कुशल तिवारी समेत कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे। धार्मिक कार्यक्रम के बीच कुशल तिवारी ने क्षेत्र की समस्याओं पर खुलकर बात की:

  • शिक्षा और संसाधनों की कमी:
  • उन्होंने कहा कि कन्या पूजन हमारी प्राचीन और महान परंपरा है,
  • लेकिन इसके साथ ही हमें अपने बच्चों के बेहतर भविष्य पर भी ध्यान देना होगा।
  • रोजगार और कारखानों का अभाव:
  • कुशल तिवारी ने कहा कि क्षेत्र में पर्याप्त कारखाने और उच्च शिक्षा के साधन न होने के कारण यहां के युवाओं को मजबूरी में बड़े शहरों की तरफ रुख करना पड़ रहा है।
  • पलायन की समस्या:
  • उन्होंने स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करने पर जोर दिया,
  • ताकि युवाओं को अपने घर-परिवार से दूर न जाना पड़े।

आस्था के बीच विकास पर मंथन:

मां वटवासिनी महाकाली गालापुर धाम में आयोजित इस कार्यक्रम ने जहां एक तरफ धार्मिक परंपरा और सामाजिक समरसता का संदेश दिया, वहीं दूसरी तरफ स्थानीय मुद्दों पर भी गंभीर मंथन देखने को मिला। अब देखना यह होगा कि क्षेत्र के युवाओं को स्थानीय स्तर पर बेहतर शिक्षा और रोजगार की सुविधाएं कब तक मिल पाती हैं।

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