मुंबई। मायानगरी मुंबई से लेकर उत्तर प्रदेश और पंजाब तक अपनी आपराधिक गतिविधियों के लिए चर्चित लॉरेंस बिश्नोई (Lawrence Bishnoi) आज देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती बन चुका है। कॉलेज की राजनीति से अपराध की दुनिया में कदम रखने वाला यह शख्स आज देश के सबसे खतरनाक और संगठित सिंडिकेट का सरगना बन चुका है।
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कड़े सुरक्षा पहरे वाली जेलों के भीतर से इंटरनेट कॉलिंग और सुरक्षित ऐप्स के जरिए अपना नेटवर्क चलाने वाले लॉरेंस की शुरुआत एक साधारण छात्र जीवन से हुई थी।
कॉलेज की राजनीति से अपराध का पहला कदम:
- पारिवारिक पृष्ठभूमि:
- लॉरेंस बिश्नोई का जन्म पंजाब के फिरोजपुर जिले में 12 फरवरी 1990 को हुआ था और उसका असल नाम बालकरन बरार उर्फ बल्लू है।
- उसके पिता पंजाब पुलिस में सिपाही थे,
- जिससे परिवार आर्थिक रूप से काफी मजबूत था।
- सोपु संगठन की स्थापना:
- उच्च शिक्षा के लिए चंडीगढ़ के डीएवी कॉलेज में दाखिला लेने के बाद उसका झुकाव छात्र राजनीति की तरफ बढ़ा।
- साल 2009 से 2011 के बीच उसने स्टूडेंट ऑर्गनाइजेशन ऑफ पंजाब यूनिवर्सिटी यानी सोपु की स्थापना की।
- शुरुआती आपराधिक मामले:
- यूनिवर्सिटी चुनावों के दौरान विरोधी गुटों से हिंसक झड़पों के कारण साल 2007 से ही उस पर हत्या के प्रयास,
- डकैती और आगजनी जैसे मुकदमे दर्ज होने शुरू हो गए थे।
जेल की सलाखों के पीछे से साम्राज्य का विस्तार:
साल 2014 के बाद से लॉरेंस लगातार जेल में बंद है और फिलहाल वह गुजरात की हाई-सिक्योरिटी साबरमती जेल में कैद है। हालांकि, कड़े पहरे भी उसके रास्ते में रुकावट नहीं बन सके। जेल के अंदर उसने देश के शातिर बदमाशों और अवैध हथियारों के सौदागरों के साथ मजबूत संबंध बनाए। आधुनिक तकनीकों के इस्तेमाल से वह जेल के अंदर से ही अपना हाई-टेक क्राइम मॉडल चला रहा है।

गोल्डी बरार और विदेशी संपर्क:
इस आपराधिक साम्राज्य को वैश्विक स्तर पर फैलाने में कनाडा में बैठे उसके करीबी साथी गोल्डी बरार की अहम भूमिका है। कॉलेज के दिनों की इनकी दोस्ती अब अपराध की दुनिया की एक मजबूत धुरी बन चुकी है। विदेशों में छिपे इन गुर्गों के जरिए गिरोह भारत में रंगदारी वसूलने, हवाला कारोबार और विदेशी हथियारों की खेप मुहैया कराने का काम आसानी से करता है।
700 से अधिक शूटर्स की खूंखार फौज:
दाऊद इब्राहिम की तर्ज पर खड़े किए गए इस सिंडिकेट के पास पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में 700 से ज्यादा प्रशिक्षित शूटर्स की फौज है। इस नेटवर्क की जड़ें कनाडा, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और यूरोप तक फैली हैं। इसके शूटर सरगना के एक इशारे पर किसी भी कोने में सनसनीखेज वारदात को अंजाम देकर आसानी से फरार हो जाते हैं।
हाई-प्रोफाइल हत्याएं और बॉलीवुड तक खौफ:
- सिद्धू मूसेवाला हत्याकांड:
- दोस्त विक्की मिद्दुखेड़ा की हत्या का बदला लेने के लिए
- इस गिरोह ने मई 2022 में पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला की सरेआम हत्या करवाई,
- जिससे यह गैंग राष्ट्रीय सुर्खियों में आया।
- मुंबई और सेलेब्रिटी टारगेट:
- दिसंबर 2023 में करणी सेना प्रमुख सुखदेव सिंह गोगामेड़ी और अक्टूबर 2024 में मुंबई में एनसीपी नेता बाबा सिद्दीकी की हत्या की जिम्मेदारी लेकर गिरोह ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया।
धार्मिक भावनाओं का दुरुपयोग और युवाओं की भागीदारी:
लॉरेंस ने 1998 के काले हिरण शिकार मामले को आधार बनाकर खुद को बिश्नोई समाज की आस्था का रक्षक बताया। इस भावनात्मक मुद्दे और सोशल मीडिया पर रील व ग्लैमरस अंदाज दिखाकर युवाओं को भ्रमित किया जाता है। कम समय में पैसा कमाने और रौब जमाने का लालच देकर नए लड़कों को पहले छोटे टास्क दिए जाते हैं और फिर उन्हें बड़े अपराधों में शामिल कर लिया जाता है।
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