जानें प्रोटेस्टर्स को कब गिरफ्तार कर सकती है पुलिस, दिल्ली में आखिर क्या हुआ?

डेस्क। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर 10 अक्टूबर को हुए विरोध प्रदर्शन के दौरान पुलिस की कार्रवाई को लेकर काफी चिंता जताई जा रही है. इस प्रदर्शन के दौरान कॉकरोच जनता पार्टी के 7000 से ज्यादा वॉलंटियर्स (protesters), एक्टिविस्ट और नागरिकों को हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई है, जिससे यह सवाल उठता है कि क्या पुलिस विरोध प्रदर्शन में शामिल होने वाले आम नागरिकों को गिरफ्तार कर सकती है?

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क्या विरोध प्रदर्शन करना एक मौलिक अधिकार है?

हमारे देश का संविधान नागरिकों को अपनी आवाज उठाने की पूरी छूट देता है।

  • संविधान का अनुच्छेद 19 (1)(b) देश के सभी नागरिकों को शांतिपूर्ण ढंग से और बिना हथियारों के एक साथ इकट्ठा होने का अधिकार प्रदान करता है.
  • इस अधिकार के जरिए आम लोग सरकारी नीतियों और फैसलों से अपनी असहमति खुलकर जता सकते हैं और सामूहिक रूप से अपनी मांगे रख सकते हैं.
  • हालांकि, यह अधिकार पूरी तरह से असीमित नहीं है.
  • अनुच्छेद 19 (3) के तहत देश की संप्रभुता,
  • अखंडता और सार्वजनिक व्यवस्था को बनाए रखने के लिए इस पर उचित प्रतिबंध भी लगाए जा सकते हैं.
  • इसलिए,
  • सिर्फ किसी शांतिपूर्ण प्रदर्शन में शामिल होने भर से किसी भी नागरिक की गिरफ्तारी को कानूनी रूप से सही नहीं ठहराया जा सकता है.

पुलिस कब और किन परिस्थितियों में कार्रवाई कर सकती है?

कानून के मुताबिक

पुलिस कुछ खास हालात में उन्हें कदम उठाने की छूट होती है।

  • यदि किसी भीड़ या प्रदर्शन की वजह से सार्वजनिक सुरक्षा को सीधा और असली खतरा पैदा हो जाए.
  • प्रदर्शन के दौरान हिंसा भड़क उठे या फिर किसी भी तरह के कानूनी प्रतिबंधों का खुला उल्लंघन किया जाए.
  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के तहत सक्षम अधिकारियों को खास परिस्थितियों में जरूरी एहतियाती आदेश जारी करने का पूरा अधिकार मिलता है.
  • यदि कोई सभा गैर-कानूनी घोषित कर दी जाए और
  • उसमें शामिल लोग वहां से हटने के निर्देश के बाद भी आदेश का पालन न करें,
  • तो अधिकारी कानून के तहत सख्त कार्रवाई कर सकते हैं.
  • हालांकि, प्रदर्शन की अनुमति न होने का मतलब यह कतई नहीं होता कि
  • वहां मौजूद हर एक प्रतिभागी को बिना सोचे-समझे गिरफ्तार कर लिया जाए;
  • पुलिस को हालात और कथित अपराध की गंभीरता पर पूरा गौर करना चाहिए.

क्या सड़क जाम करने पर गिरफ्तारी हो सकती है?

अक्सर प्रदर्शन के दौरान सड़कों पर जाम लग जाता है, जिस पर कानूनी नियम स्पष्ट हैं।

  • सार्वजनिक सड़कों पर लंबे समय तक कब्जा जमाकर नहीं बैठा जा सकता,
  • क्योंकि इससे आम जनता और दूसरे लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है.
  • शाहीन बाग मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से इस बात पर जोर दिया था कि सार्वजनिक रास्तों और सड़कों पर हमेशा के लिए कब्जा नहीं किया जा सकता है.
  • पुलिस तब सख्ती से दखल दे सकती है जब प्रदर्शनकारी गैर-कानूनी तरीके से ट्रैफिक रोकते हैं, जरूरी और आपातकालीन सेवाओं में रुकावट डालते हैं,
  • या फिर आम लोगों की सुरक्षा के लिए खतरा बनते हैं.
  • इन सबके बावजूद अधिकारियों को हमेशा एक शांतिपूर्ण प्रदर्शन और गैर-कानूनी व्यवहार के बीच का फर्क समझना होता है और
  • स्थिति के अनुसार सबसे उचित कदम उठाना चाहिए.

बिना वारंट गिरफ्तारी और हिरासत के नियम

कानून में गिरफ्तारी और हिरासत को लेकर स्पष्ट प्रक्रिया तय की गई है।

  • अगर किसी विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसा होती है,
  • तोड़फोड़ की जाती है या कोई गंभीर अपराध होता है,
  • तो भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की शर्तों के पूरा होने पर पुलिस बिना वारंट के भी किसी व्यक्ति को गिरफ्तार कर सकती है.
  • लेकिन किसी प्रदर्शन में मौजूद हर व्यक्ति को सिर्फ इसलिए गिरफ्तार नहीं किया जा सकता क्योंकि भीड़ में मौजूद किसी अन्य व्यक्ति ने कोई अपराध किया है.
  • हिरासत का मतलब आम तौर पर किसी व्यक्ति की आवाजाही पर कुछ वक्त के लिए रोक लगाना होता है,
  • जबकि गिरफ्तारी किसी कथित अपराध या कानूनी रूप से मान्य आधार से जुड़ी एक औपचारिक कानूनी प्रक्रिया है.
  • संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक के जीवन और व्यक्तिगत स्वतंत्रता की रक्षा करता है,
  • जिसके तहत किसी की भी स्वतंत्रता छीनने के लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना अनिवार्य है.

गिरफ्तार व्यक्तियों और महिलाओं के विशेष अधिकार

यदि किसी परिस्थिति में गिरफ्तारी होती भी है, तो कानून नागरिकों और महिलाओं को कुछ खास अधिकार और सुरक्षा देता है।

  • गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को उसकी गिरफ्तारी के पुख्ता आधार के बारे में तुरंत जानकारी दी जानी चाहिए और उसे अपने बचाव के लिए वकील से सलाह लेने का पूरा अधिकार होता है.
  • भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 48 के तहत पुलिस का यह कर्तव्य है कि वे गिरफ्तारी की सूचना उसके किसी चुने हुए रिश्तेदार,
  • करीबी दोस्त या बताए गए अन्य व्यक्ति को दें.
  • सामान्य नियमों के अनुसार गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को यात्रा में लगने वाले जरूरी समय को छोड़कर 24 घंटे के भीतर सबसे पास के मजिस्ट्रेट के सामने पेश करना अनिवार्य होता है;
  • इसके बाद आगे हिरासत में रखने के लिए अदालत की कानूनी मंजूरी लेनी पड़ती है.
  • महिलाओं की गिरफ्तारी के संबंध में विशेष सुरक्षा उपाय दिए गए हैं,
  • जिसके तहत आम तौर पर किसी भी महिला को सूरज डूबने के बाद और सूरज उगने से पहले गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है.
  • विशेष परिस्थितियों में यदि रात के समय गिरफ्तारी करनी पड़े,
  • तो महिला पुलिस अधिकारी को पहले एक लिखित रिपोर्ट तैयार करनी होगी और प्रथम श्रेणी के सक्षम न्यायिक मजिस्ट्रेट से इसकी पूर्व अनुमति लेनी होगी.

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