लाइफस्टाइल डेस्क। आजकल सोशल मीडिया पर बेहतरीन रील्स बनानी हों या ऑफिस की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में खास दिखना हो, हर किसी पर ‘परफेक्ट’ दिखने की होड़ मची है। आंखों को बड़ा और खूबसूरत (beauty) बनाने के लिए फेक आईलैश, कलर कॉन्टैक्ट लेंस और पलकें बढ़ाने वाले आई-सीरम का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ब्यूटी का यह शौक आपकी आंखों की रोशनी हमेशा के लिए छीन सकता है?
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नेत्र विशेषज्ञों का कहना है कि क्लिनिक में हर हफ्ते ऐसे कई युवा मरीज आ रहे हैं, जिनकी आंखें इन ब्यूटी ट्रेंड्स के चक्कर में गंभीर रूप से प्रभावित हुई हैं।
1. फेक आईलैश का बढ़ता क्रेज और इसके नुकसान
लंबी और घनी पलकें आंखों को सुंदर जरूर बनाती हैं, लेकिन इन्हें चिपकाने के लिए इस्तेमाल होने वाले गोंद (ग्लू) में हानिकारक केमिकल्स होते हैं। यह गोंद आंखों की बेहद नाजुक सतह के करीब लगता है। इससे आंखों में एलर्जी, लाली, जलन, सूजन और खतरनाक इंफेक्शन हो सकता है। इसके अलावा, नकली पलकों के भारीपन से असली पलकों की जड़ों पर खिंचाव पड़ता है, जिससे असली पलकें टूटकर हमेशा के लिए झड़ सकती हैं।
2. पलकें बढ़ाने वाले आई-सीरम के साइड इफेक्ट्स
बाजार में मिलने वाले बिना जांचे-परखे आई-सीरम भी आंखों के लिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। इन सीरम में कुछ ऐसे रसायन होते हैं जो पलकों के आसपास की त्वचा को डार्क (काला) कर देते हैं। साथ ही, इनके लगातार प्रयोग से आंखों में चुभन, पानी बहने और ड्राई आई की शिकायत होने लगती है।
3. बिना डॉक्टरी सलाह के सस्ते और कलर लेंस पहनना
बिना आंखों की जांच कराए इंटरनेट या पार्लर से खरीदे गए सस्ते कलर लेंस सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाते हैं। अक्सर लोग सोचते हैं कि बिना पावर वाले लेंस सुरक्षित होते हैं, जो कि बिल्कुल गलत है।

- ऑक्सीजन की कमी:
- अगर लेंस की फिटिंग सही न हो, तो पुतली (कॉर्निया) तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती।
- कॉर्नियल अल्सर:
- ऑक्सीजन न मिलने से आंख में घाव (अल्सर) बन जाते हैं। ये घाव ठीक होने के बाद भी ऐसे निशान छोड़ जाते हैं जिससे हमेशा के लिए धुंधलापन आ जाता है।
- कॉर्निया ट्रांसप्लांट:
- गंभीर मामलों में कॉर्निया बदलने तक की नौबत आ जाती है।
- गलत आदतें:
- दोस्तों से लेंस शेयर करना, उन्हें पानी से धोना या पहनकर सो जाना इंफेक्शन के खतरे को सौ गुना बढ़ा देता है।
4. स्क्रीन टाइम और आई-मेकअप का डबल अटैक
कॉर्पोरेट जॉब में एसी की सूखी हवा, देर रात तक काम और लगातार स्क्रीन देखने से आंखें पहले ही ड्राई हो जाती हैं। ऐसे में 10 से 12 घंटे तक कॉन्टैक्ट लेंस पहनना और भारी आई-मेकअप लगाना आंखों को बुरी तरह थका देता है और रोशनी पर असर डालता है।
खतरे के ये लक्षण दिखते ही हो जाएं अलर्ट
यदि आपको आंखों में नीचे दिए गए लक्षणों में से कुछ भी महसूस हो,
तो इसे भूलकर भी अनदेखा न करें:
- आंखों का लगातार लाल रहना या तेज दर्द होना
- आंखों में कुछ चुभना या भारीपन महसूस होना
- तेज रोशनी से आंखों में तकलीफ होना या पानी आना
- आंखों से मवाद निकलना या धुंधला दिखाई देना
विशेषज्ञ सलाह: ऐसे कोई भी लक्षण दिखने पर तुरंत अपने कॉन्टैक्ट लेंस निकालें और बिना किसी देरी के आंखों के डॉक्टर (ऑफ्थैल्मोलॉजिस्ट) से संपर्क करें।
आंखों को सुरक्षित रखने के जरूरी और आसान टिप्स
- डॉक्टरी परामर्श: बिना आंखों की जांच और डॉक्टर की पर्ची के कोई भी कॉन्टैक्ट लेंस कभी न खरीदें।
- मेकअप और लेंस रिमूवल: रात को सोने से पहले आई-मेकअप पूरी तरह साफ करें और लेंस निकालकर ही सोएं।
- पैच टेस्ट: बाजार का कोई भी नया आई-प्रोडक्ट लगाने से पहले अपनी त्वचा पर थोड़ा सा लगाकर टेस्ट जरूर करें।
- 20-20-20 नियम: गैजेट्स पर काम करते समय हर 20 मिनट बाद 20 फीट दूर किसी वस्तु को 20 सेकंड के लिए देखें।
फैशन और ट्रेंड्स तो बदलते रहेंगे, लेकिन हमारी आंखें दोबारा नहीं मिल सकतीं।
खूबसूरत दिखने के चक्कर में अपनी अनमोल आंखों की सेहत से कभी समझौता न करें।
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