Katrina Kaif के पोस्ट-प्रेग्नेंसी लुक पर मचा बवाल! जाने डिलीवरी के बाद कैसे घटाएं वजन

लाइफस्टाइल डेस्क। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री कटरीना कैफ (Katrina Kaif) के पोस्ट-प्रेग्नेंसी लुक को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा और टीका-टिप्पणी देखने को मिली। इस घटना ने एक बेहद गंभीर बहस को जन्म दिया है कि मां बनने के बाद महिलाओं पर जल्द से जल्द अपने पुराने ‘परफेक्ट फिगर’ में लौटने का दबाव कितना जायज है?

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सच तो यह है कि यह दबाव सिर्फ मशहूर हस्तियों (सेलिब्रिटीज) तक सीमित नहीं है। हमारे समाज में आम महिलाओं को भी बच्चा होने के बाद वजन घटाने और पुराने कपड़ों में फिट होने के लिए मानसिक दबाव और तानों का सामना करना पड़ता है। हालांकि, मेडिकल साइंस की मानें तो डिलीवरी के तुरंत बाद शरीर का पहले जैसी स्थिति में आ जाना न तो जरूरी है और न ही हर महिला के लिए शारीरिक रूप से संभव।

प्रेग्नेंसी के बाद शरीर में बदलाव क्यों होते हैं?

गर्भावस्था के नौ महीनों के दौरान एक महिला के शरीर में व्यापक हार्मोनल और शारीरिक परिवर्तन होते हैं। इस अवधि में:

  • शरीर में रक्त (ब्लड) की कुल मात्रा बढ़ जाती है।
  • शिशु के विकास के साथ गर्भाशय का आकार कई गुना बढ़ जाता है।
  • स्तन (ब्रेस्ट) के आकार में बदलाव आता है।
  • पेट की अंदरूनी मांसपेशियों और पेल्विक फ्लोर पर भारी खिंचाव और दबाव पड़ता है।

डिलीवरी के बाद शरीर को इन तमाम बड़े बदलावों से उबरने और सामान्य स्थिति में लौटने में समय लगता है। गर्भाशय का सिकुड़कर अपने मूल आकार में आना, हार्मोन का दोबारा संतुलित होना और मांसपेशियों का ताकत पाना एक स्वाभाविक और धीमी प्रक्रिया है। यह कोई दौड़ नहीं है, बल्कि एक प्राकृतिक रिकवरी फेज है, जिसकी गति हर महिला के शरीर के अनुसार अलग-अलग होती है।

वजन घटने में महीनों का समय क्यों लगता है?

बच्चे के जन्म के तुरंत बाद शिशु, एम्नियोटिक फ्लूइड और प्लेसेंटा का वजन कम होता है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान जमा हुआ बाकी फैट घटने में महीनों लग सकते हैं। इसके मुख्य कारण निम्नलिखित हैं:

  1. हार्मोनल बदलाव और नींद की कमी:
  2. डिलीवरी के बाद के हार्मोनल उतार-चढ़ाव भूख और वसा (फैट) के संचय को प्रभावित करते हैं।
  3. इसके अलावा नवजात शिशु की लगातार देखभाल के कारण मां की रातों की नींद पूरी नहीं हो पाती।
  4. इस भारी मानसिक और शारीरिक थकान की वजह से नियमित कसरत या वर्कआउट करना बहुत कठिन होता है।
  5. ब्रेस्टफीडिंग से जुड़ा भ्रम:
  6. आम धारणा के विपरीत, केवल स्तनपान (ब्रेस्टफीडिंग) कराने से वजन तेजी से नहीं घटता।
  7. स्तनपान कराने वाली मां को अधिक ऊर्जा और पोषण की आवश्यकता होती है।
  8. इस दौरान कुछ महिलाओं का वजन घटता है जबकि कुछ का वजन स्थिर रहता है।
  9. शारीरिक बनावट में बदलाव:
  10. वजन कम होने के बाद भी यह आवश्यक नहीं है कि शरीर बिल्कुल पहले जैसा दिखे।
  11. पेट की त्वचा का ढीलापन और मांसपेशियों का खिंचाव काफी समय तक बना रह सकता है।

असली रिकवरी का अर्थ क्या है?

एक नई मां के स्वास्थ्य और रिकवरी का आकलन सिर्फ इंच-टेप या वजन मापने वाली मशीन से नहीं किया जा सकता। असली रिकवरी का अर्थ है महिला की शारीरिक ऊर्जा, काम करने की क्षमता, आंतरिक मजबूती और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होना।

यदि डिलीवरी नॉर्मल हुई है, तो डॉक्टर की सलाह पर हल्की चहलकदमी (वॉक) शुरू की जा सकती है। हालांकि, सिजेरियन (C-Section) डिलीवरी के मामलों में भारी वर्कआउट या जिम जाने से पहले डॉक्टर से परामर्श लेना अनिवार्य है। इस संवेदनशील समय में शरीर को प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और आवश्यक फैट से भरपूर संतुलित आहार की जरूरत होती है।

तेजी से दुबले होने के लिए डाइटिंग करना या भूखे रहना मां और शिशु दोनों के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है।

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