नई दिल्ली। केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी को अब शिक्षा मंत्रालय की अतिरिक्त जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2026 के NEET विवाद और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के प्रबंधन को लेकर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार करने के बाद प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार दिया है। आइए जानते हैं उनकी शिक्षा, शुरुआती जीवन और राजनीतिक सफर के बारे में।
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साल 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार दूसरी बार सरकार बनने के बाद 30 मई, 2019 को प्रह्लाद जोशी को पहली बार कैबिनेट में जगह मिली और उन्हें संसदीय कार्य मंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई। वे मोदी सरकार में कोयला मंत्री भी रहे और इसके बाद वर्तमान में मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल में प्रह्लाद जोशी (Pralhad Joshi) उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्रालय के साथ नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और अब उन्हें शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी दिया गया है।

प्रह्लाद जोशी ने बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री हासिल की है। उन्होंने कर्नाटक के हुब्बली स्थित के.एस. आर्ट्स कॉलेज से स्नातक किया, जो कर्नाटक यूनिवर्सिटी, धारवाड़ से संबद्ध है। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा रेलवे स्कूल से प्राप्त की, जबकि आगे की स्कूली पढ़ाई हुब्बली के न्यू इंग्लिश स्कूल से पूरी की।
कर्नाटक में ही उन्होंने अपनी अधिकांश शिक्षा पूरी की और बाद में कला संकाय से स्नातक की डिग्री प्राप्त की। युवा अवस्था में ही वे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े और बाद में संगठनात्मक एवं राजनीतिक गतिविधियों के माध्यम से सक्रिय राजनीति में प्रवेश किया। प्रह्लाद जोशी वर्ष 2004 से लगातार धारवाड़ लोकसभा सीट का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। वह लगातार पांच बार लोकसभा सांसद चुने जा चुके हैं और कर्नाटक भाजपा के सबसे अनुभवी नेताओं में उनकी गिनती होती है।
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