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शनिवार, जुलाई 25, 2026

भारत ही नहीं इन देशों में भी हो चुके हैं Gen Z आंदोलन, इस देश का हुआ था बुरा हश्र

डेस्क। नीट पेपर लीक मामले को लेकर पिछले कुछ दिनों से गहमागहमी बनी हुई है। जिसके चलते शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया है। चलिए जान लेते हैं कि आखिर भारत से पहले किन देशों में जेन-जी के प्रदर्शन देखने को मिले।

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बांग्लादेश:

बांग्लादेश में साल 2024 में युवाओं का ऐसा ही एतिहासिक विरोध प्रदर्शन देखने को मिला था। वहां पर सरकारी नौकरियों में भेदभावपूर्ण आरक्षण नीति के खिलाफ छात्रों ने सड़कों पर मोर्चा खोला था। देखते ही देखते यह आंदोलन देश भर में फैल गया और बेहद उग्र हो गया। उथल पुथल और भारी दबाव के बीच तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा और वे देश छोड़कर भारत में शरण लेने के लिए मजबूर हुईं। इस घटनाक्रम को दुनिया की पहली सफल Gen Z movements के तौर पर देखा गया।

नेपाल:

नेपाल में साल 2025 में प्रशासनिक भ्रष्टाचार और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर लगाए गए प्रतिबंधों से आक्रोशित युवाओं ने सीधे संसद भवन का रुख किया। प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच हुई हिंसक झड़पों में पुलिस की गोलीबारी से 20 लोगों की मौत हो गई जबकि 200 से अधिक लोग घायल हो गए। इस दौरान गुस्साए लोगों ने उप-प्रधानमंत्री विष्णु प्रसाद पर भी हमला किया। चौतरफा बढ़ते दबाव से सामने घुटने टेकते हुए तत्कालीन प्रधानमंत्री के.पी.शर्मा ओली को अपने पद से इस्तीफा देना पड़ा।

थाईलैंड:

थाईलैंड में जुलाई 2025 के दौरान राजनीतिक संकट तब गहराया जब कंबोडिया के साथ लीक हुए गोपनीय संचार और सैन्य दुर्व्यवहार की खबरें सामने आईं। इसके विरोध में हजारों की तादात में युवा सड़कों पर उतर आए और व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। राजनीतिक हलचल और जनआक्रोश के बीच कानूनी प्रक्रिया तेज हुई और अदालत के आदेश के बाद अगस्त 2025 में तत्कालीन प्रधानमंत्री फेथोंगथेंग शिनावात्रा को उनके पद से हटा दिया गया।

केन्या:

दुनिया भर के अन्य हिस्सों में भी युवाओं के नेतृत्व में बड़े बदलाव देखे गए हैं। केन्या में सरकार द्वारा लाए गए विवादास्पद टैक्स बढ़ोतरी वाले फाइनेंस बिल के खिलाफ देशव्यापी प्रदर्शन हुए। इसी तरह से श्रीलंका, इंडोनेशिया और पेरू जैसे देशों में भी भीषण आर्थिक संकट, बेकाबू महंगाई और पेंशन के नियमों में किए गए बदलावों के खिलाफ नई पीढ़ी सड़कों पर उतरी। भारत से केन्या तक इन आंदोलनों की मुख्य वजह युवाओं का असंतोष ही रहा।

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