नई दिल्ली। पश्चिम एशिया के गहराते संकट और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बड़ी मिसाल पेश की है। देशवासियों से तेल बचाने की अपील करने के बाद उन्होंने खुद के सुरक्षा काफिले में गाड़ियों की संख्या को आधा करने का निर्देश दिया है। इसी क्रम में पहले यह जान लेते हैं कि उनके काफिले में कौन-कौन सी गाड़ियां चलती हैं?
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सामान्य परिस्थितियों में PM के काफिले में कम से कम 18 मुख्य गाड़ियां होती हैं। इसके अलावा यातायात प्रबंधन और अन्य व्यवस्थाओं के लिए 6 से 8 अतिरिक्त गाड़ियां साथ चलती हैं। कुल मिलाकर लगभग 24 गाड़ियों का यह लश्कर प्रधानमंत्री की सुरक्षा को अभेद्य बनाता है। इस काफिले में पायलट कार, एस्कॉर्ट वाहन, जैमर गाड़ी और एंबुलेंस जैसे महत्वपूर्ण अंग शामिल होते हैं। अब इसी संख्या को घटाकर सीमित करने की योजना पर काम किया जा रहा है।

काफिले में शामिल जैमर गाड़ी का रोल सबसे अहम होता है। इस गाड़ी के ऊपर कई एंटीना लगे होते हैं, जिनका काम आसपास के रेडियो सिग्नल्स को ठप करना होता है, ताकि कोई रिमोट कंट्रोल बम सक्रिय न किया जा सके। इसके अलावा काफिले में रेंज रोवर सेंटिनल, टोयोटा लैंड क्रूजर और बीएमडब्ल्यू-7 सीरीज जैसी बख्तरबंद गाड़ियां भी शामिल रहती हैं। एसपीजी के कमांडो इन गाड़ियों में सवार होकर प्रधानमंत्री की मुख्य कार को चारों तरफ से घेरकर चलते हैं।
सुरक्षा रणनीतियों के तहत प्रधानमंत्री के काफिले में एक जैसी दिखने वाली दो से तीन गाड़ियां चलती हैं। अंतिम समय तक यह गोपनीय रखा जाता है कि प्रधानमंत्री किस गाड़ी में बैठेंगे। यह डिकॉय रणनीति हमलावरों को भ्रमित करने के लिए अपनाई जाती है। अगर प्रधानमंत्री किसी दूसरे राज्य के दौरे पर होते हैं, तो वहां की स्थानीय पुलिस की गाड़ियां और स्पेयर कारें भी काफिले का हिस्सा बन जाती हैं, जिससे गाड़ियों की कुल संख्या और बढ़ जाती है।
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