नई दिल्ली। AAP के अंदर एक राजनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। राघव चड्ढा और राज्यसभा के 6 दूसरे सदस्यों ने पार्टी से अलग होकर भारतीय जनता पार्टी के साथ जुड़ने का फैसला किया है। इस कदम के बाद पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने यह कह दिया है कि वह राष्ट्रपति से मिलकर इन सांसदों के रिकॉल की मांग करेंगे। आइए जानते हैं क्या होता है राइट टू रिकॉल बिल?
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Right To Recall एक प्रस्तावित लोकतांत्रिक व्यवस्था है। यह मतदाताओं को यह अधिकार देती है कि वे अपने चुने हुए प्रतिनिधियों को उनका कार्यकाल समाप्त होने से पहले ही हटा सकें। हाल के दिनों में इस विस्तार की जोरदार वकालत खुद राघव चड्ढा ने ही की थी।इस अवधारणा का मूल विचार यह है कि सांसदों, विधायकों या फिर स्थानीय प्रतिनिधियों को अपने पूरे कार्यकाल के दौरान जनता के प्रति जवाबदेह बने रहना चाहिए, न सिर्फ चुनावों के दौरान।

असलियत यह है कि भारतीय संविधान में सांसदों या फिर विधायकों को रिकॉल का कोई भी प्रावधान मौजूद नहीं है। भले ही सुनने में यह विचार काफी ज्यादा शक्तिशाली लगता हो लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल मतदाता किसी मौजूदा सांसद को रिकॉल प्रक्रिया के जरिए सीधे तौर पर नहीं हटा सकते।
असलियत यह है कि भारतीय संविधान में सांसदों या फिर विधायकों को रिकॉल का कोई भी प्रावधान मौजूद नहीं है। भले ही सुनने में यह विचार काफी ज्यादा शक्तिशाली लगता हो लेकिन राष्ट्रीय स्तर पर इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। इसका मतलब यह है कि फिलहाल मतदाता किसी मौजूदा सांसद को रिकॉल प्रक्रिया के जरिए सीधे तौर पर नहीं हटा सकते।
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