नई दिल्ली। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने 18 अप्रैल को राष्ट्र के नाम संबोधन में विपक्ष, खासकर कांग्रेस पर तीखा निशाना साधा। लोगों के मन में इस संबोधन को लेकर काफी उत्सुकता रहती है। आइए जानते हैं कि देश में कब-कब प्रधानमंत्री के संबोधन ने जनता को चौंकाया है?
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भारत का पहला और शायद सबसे यादगार संबोधन 14 अगस्त 1947 की आधी रात को हुआ था। जवाहरलाल नेहरू ने ट्रिस्ट विद डेस्टिनी वाला एक भाषण दिया था। यह सिर्फ एक प्रतीकात्मक भाषण नहीं था बल्कि इसने एक नए राष्ट्र के जन्म की घोषणा की थी और आजाद भारत की भावनात्मक नींव रखी थी।
सबसे नाटकीय और विवादित पलों में से एक 1975 में आया था। इंदिरा गांधी ने देर रात देश को संबोधित करते हुए आपातकाल की घोषणा की थी। रातों-रात नागरिकों की आजादी पर पाबंदी लगा दी गई थी और पूरा देश हक्का-बक्का रह गया था।

प्रधानमंत्रियों ने इन संबोधनों का इस्तेमाल बड़े नीतिगत बदलावों की घोषणा करने के लिए भी किया। मनमोहन सिंह के नेतृत्व में 1991 में हुए आर्थिक सुधारों ने भारत की अर्थव्यवस्था का कायाकल्प कर दिया। वहीं अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा 1998 में पोखरण परमाणु परीक्षण की घोषणा ने भारत को एक परमाणु शक्ति के रूप में स्थापित किया। इस घोषणा ने भारत देश के साथ-साथ पूरी दुनिया को भी हैरान किया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2016 में रात 8:00 नोटबंदी की घोषणा करके पूरे देश को रातों-रात चौंका दिया था। वे अक्सर ही बड़े फैसलों की घोषणा करने के लिए अचानक देश को संबोधित करते हैं। इसी तरह अनुच्छेद 370, मिशन शक्ति, कृषि कानून की वापसी और जीएसटी सुधारों जैसी नैतिक पहलों से जुड़ी सभी घोषणाएं सीधे संबोधन के जरिए ही की गई।
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