डेस्क। श्रमिकों का वेतन बढ़ाने को लेकर प्रदर्शन करने का आज पांचवां दिन है। नोएडा पुलिस ने जगह-जगह सुरक्षा कड़ी कर दी है। फिर भी प्रदर्शन की छिटपुट घटनाओं की सूचना आ रही है। किसी भी प्रकार की अनहोनी को रोकने के लिए पुलिस पूरी मुस्तैदी दिखा रही है। फिर भी अराजक तत्वों ने सेक्टर 121 और नोएडा फेस-2 में कुछ हिंसक घटनाओं को अंजाम दिया है। आइए जानते हैं कि इतिहास में पहले कब बड़े मजदूर प्रदर्शन हुए हैं?
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बता दें कि देश आजाद होने से पहले ही कई ऐतिहासिक विरोध प्रदर्शनों ने संगठित मज़दूर आंदोलन की नींव रखी। 1918 की अहमदाबाद में मिल हड़ताल हुई और इसका नेतृत्व खुद देश के महान शख्स महात्मा गांधी ने किया था और ये आंदोलन एक अहम मोड़ साबित हुई। इसने Workers विवादों में विरोध के अहिंसक तरीकों के इस्तेमाल की शुरुआत की।

इसी तरह 1928 की बॉम्बे कपड़ा हड़ताल के दौरान लगभग 150,000 मज़दूरों ने कई महीनों तक विरोध प्रदर्शन किया। इसने औपनिवेशिक काल के दौरान ट्रेड यूनियनों की बढ़ती ताकत को दिखाया। 1982 में बॉम्बे में हुई कपड़ा हड़ताल ने भारत के इतिहास के सबसे बड़े औद्योगिक विरोध प्रदर्शनों में से एक साबित कर दिया था। इस दौरान मज़दूरों ने वेतन में कटौती और नौकरियों के जाने के खिलाफ आवाज उठाई थी।
सिर्फ यही नहीं पिछले कुछ सालों में बढ़ते मज़दूरों के विरोध प्रदर्शनों ने चिंता और भी ज्यादा बढ़ा दी है। 2019 की राष्ट्रव्यापी हड़ताल में लगभग 150 मिलियन श्रमिकों ने हिस्सा लिया। इसके बाद 26 नवंबर 2020 को लगभग 250 मिलियन श्रमिक और किसान इस हड़ताल में शामिल हुए। इन विरोध-प्रदर्शनों का मुख्य कारण श्रम कानूनों, रोज़गार की सुरक्षा और आर्थिक सुधारों से जुड़ी चिंताएँ थीं।
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