नई दिल्ली। पिछले कुछ दिनों से LPG Cylinder की किल्लत के दावे ने आम आदमी की चिंता बढ़ा दी है। मिडिल ईस्ट में जारी तनाव ने भारत की एनर्जी सप्लाई चेन को हिलाकर रख दिया है। Strait of Hormuz से होने वाली गैस की सप्लाई बाधित होने के कारण कई शहरों में ऐसी नौबत आई है। आइए जानते हैं आखिर कब कब इस सरकार में सिलेंडर के लिए लाइन लगाने की नौबत आई?
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मोदी सरकार के 12 वर्षों के कार्यकाल में सीधे तौर पर गैस के लिए लंबी कतारें लगने की नौबत कम ही आई है, लेकिन कुछ मौके चुनौतीपूर्ण रहे हैं। मई 2016 में जब प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (PMUY) लॉन्च हुई, तो भारत में गैस कनेक्शन की मांग में जबरदस्त उछाल आया। अचानक करोड़ों नए उपभोक्ताओं के जुड़ने से ग्रामीण क्षेत्रों में गैस एजेंसियों शुरुआती दौर में रिफिल के लिए कतारें लगनी शुरू हो गई थीं।

मार्च 2020 में जब देश भर में अचानक लॉकडाउन लगा, तो गैस की सप्लाई और डिलीवरी चेन बुरी तरह चरमरा गई थी। उस समय कई शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर लोगों की भारी भीड़ देखी गई थी।2023 के मध्य में जब रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल और गैस की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचीं, तब भी भारत में पैनिक बुकिंग देखी गई थी।
मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में जब पहल स्कीम के तहत आधार कार्ड को गैस कनेक्शन से जोड़ना अनिवार्य किया गया, तब भी एजेंसियों पर भारी भीड़ उमड़ी थी। हालांकि ये कतारें गैस की कमी की वजह से नहीं बल्कि केवाईसी (KYC) अपडेट कराने और फर्जी कनेक्शन हटवाने के लिए थीं। इसी कड़ाई के कारण सरकार ने करोड़ों नकली कनेक्शनों को सिस्टम से बाहर किया था।
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