36.3 C
Lucknow
Tuesday, March 10, 2026

भारत में राष्ट्रपति के स्वागत का क्या होता है प्रोटोकॉल, कौन करता है रिसीव?

नई दिल्ली। भारत के President का पद देश का सर्वोच्च संवैधानिक पद है और उनके किसी राज्य में आगमन पर स्वागत के नियम पत्थर की लकीर जैसे होते हैं। किसी राज्य में राष्ट्रपति की अगवानी केवल एक औपचारिक शिष्टाचार नहीं, बल्कि ‘वॉरंट ऑफ प्रेसिडेंस’ के तहत एक अनिवार्य प्रक्रिया है। यह प्रोटोकॉल न केवल पद की गरिमा को दर्शाता है, बल्कि केंद्र और राज्य के बीच संवैधानिक संबंधों की मजबूती का प्रतीक भी होता है।

यह भी पढ़ें-राष्ट्रपति के अभिभाषण पर क्यों जरूरी होता है पीएम का संबोधन, समझें यहां

जब भारत का राष्ट्रपति किसी राज्य की सीमा में प्रवेश करता है या हवाई अड्डे पर उतरता है, तो वहां स्वागत के लिए गणमान्य व्यक्तियों की एक सूची पहले से तय होती है। आधिकारिक प्रोटोकॉल के अनुसार, राज्य के प्रथम नागरिक के रूप में राज्यपाल को राष्ट्रपति की अगवानी के लिए हवाई पट्टी पर मौजूद रहना अनिवार्य है। राज्यपाल के ठीक बाद राज्य के मुख्यमंत्री का स्थान आता है।

इन दोनों का उपस्थित होना राज्य की ओर से सर्वोच्च सम्मान का प्रतीक माना जाता है। मुख्यमंत्री की उपस्थिति इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि वे राज्य की चुनी हुई सरकार और जनता का प्रतिनिधित्व करते हैं।यदि कोई अपरिहार्य कारण, स्वास्थ्य संबंधी समस्या या बहुत जरूरी सरकारी कार्य आ जाए, तो मुख्यमंत्री अपनी जगह एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री को अपना प्रतिनिधि बनाकर भेज सकते हैं।

मुख्यमंत्री की गैर-मौजूदगी और किसी प्रतिनिधि का न होना अक्सर राजनीतिक विवाद और ‘प्रोटोकॉल के उल्लंघन’ के रूप में देखा जाता है। स्वागत की यह पूरी प्रक्रिया राष्ट्रपति भवन द्वारा पहले से स्वीकृत कार्यक्रम के अनुसार होती है, जिसमें राज्य सरकार अंतिम समय में कोई भी बदलाव नहीं कर सकती है। राज्य में प्रवास के दौरान राष्ट्रपति की सुरक्षा और उनके रहने की व्यवस्था पूरी तरह राज्य सरकार के अधीन होती है।

Tag: #nextindiatimes #President #DraupadiMurmu

RELATED ARTICLE

close button