एंटरटेनमेंट डेस्क। मधुबाला (Madhubala) सिनेमा की उम्दा अदाकारा थीं। उनका अभिनय, उनकी खूबसूरती और उनका डेडिकेशन काबिल-ए-तारीफ था। वह किसी भी किरदार को इतनी शिद्दत से निभाती थीं कि वह असली लगता था। एक बार तो उन्होंने एक सीन को रियल बनाने के लिए असली दर्द सहा और कई दिनों तक बेड रेस्ट पर रहीं। यह किस्सा है 1960 में रिलीज हुई के. आसिफ की कल्ट फिल्म मुगल-ए-आजम का।
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फिल्म की कहानी सलीम (दिलीप कुमार) की है जिसे एक खूबसूरत तवायफ अनारकली (मधुबाला) से मोहब्बत हो जाती है। वह उसके साथ जिंदगी बिताना चाहता है लेकिन सलीम के पिता को उनका रिश्ता हरगिज मंजूर नहीं था। वह अनारकली को जेल में कैद कर उसे जंजीरों से बांध देते हैं।

के. आसिफ उस सीन को असली दिखाना चाहते थे। इसलिए उन्होंने नकली जंजीरों की बजाय असली भारी लोहे के जंजीरों का इस्तेमाल किया। उस वक्त मधुबाला दिल की बीमारी से जूझ रही थीं लेकिन उन्होंने फिल्म के प्रति समर्पण दिखाया और असली लोहे के चैन के साथ सीन शूट किया।
IMDb की मानें तो मधुबाला शॉट्स के बीच में भी उन भारी जंजीरों में जकड़ी हुई खड़ी रहती थीं, ताकि उनके चेहरे पर दिखने वाला दर्द बिल्कुल असली लगे। इन भारी जंजीरों की वजह से मधुबाला के शरीर पर गहरीं चोटें आई थीं। इसकी वजह से उनके शरीर पर निशान भी पड़ गया था। वह कई दिनों तक बिस्तर पर पड़ी रही थीं। ‘मुगल-ए-आजम’ सिनेमा जगत की सबसे सफल फिल्मों में से एक है। इस फिल्म को कल्ट क्लासिक का दर्जा मिला है। फिल्म में दिलीप-मधुबाला के अलावा पृथ्वीराज कपूर, दुर्गा खोटे, निगार सुल्तान, अजीत और मुराद जैसे कलाकार अहम भूमिकाओं में थे।
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