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Friday, May 22, 2026

कटे सिर के बाद भी जिंदा…, जानें कॉकरोच क्यों कहलाता है ‘अमर जीव’?

डेस्क। इन दिनों ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ नाम का डिजिटल आंदोलन लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। इस नाम से जुड़े अकाउंट और उससे पैदा हुई सियासी हलचल ने अचानक लोगों का ध्यान उस छोटे से जीव की ओर खींच दिया है, जिसे आमतौर पर लोग घरों की गंदगी से जोड़कर देखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही कॉकरोच दुनिया के सबसे ताकतवर और जीवट जीवों में गिना जाता है?

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कॉकरोच (Cockroach) की दुनिया में सबसे ज्यादा खतरनाक और तेजी से फैलने वाली प्रजाति जर्मन कॉकरोच मानी जाती है। इसकी एक मादा कॉकरोच महज 100 से 200 दिनों तक जिंदा रहती है, लेकिन इतने कम समय में ही वह 200 से 400 तक बच्चे पैदा कर देती है। यही वजह है कि एक बार अगर किसी घर या इलाके में कॉकरोच पनप जाएं, तो उन्हें खत्म करना बेहद मुश्किल हो जाता है।

मादा कॉकरोच अपने जीवनकाल में चार से आठ अंडों के कैप्सूल तैयार करती है। वैज्ञानिक भाषा में इन्हें “ऊथेका” कहा जाता है। सबसे हैरानी की बात यह है कि एक ही कैप्सूल में 30 से 40 अंडे मौजूद होते हैं। यही कारण है कि इनकी आबादी कुछ ही दिनों में कई गुना बढ़ जाती है। जर्मन कॉकरोच के अंडे महज 28 दिनों में फूट जाते हैं। इन अंडों से निकलने वाले छोटे-छोटे बच्चे बेहद तेजी से बड़े होते हैं और कुछ ही समय में खुद प्रजनन करने लगते हैं।

यही वजह है कि कॉकरोच दुनिया के लगभग हर कोने में फैल चुके हैं। जर्मन प्रजाति के अलावा अमेरिकन और ओरिएंटल कॉकरोच भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। अमेरिकन कॉकरोच करीब एक साल तक जीवित रहता है और अपने जीवन में लगभग 150 से 200 बच्चे पैदा करता है। वहीं ओरिएंटल कॉकरोच, जो अक्सर नमी और गंदगी वाले इलाकों में दिखते हैं, लगभग 180 दिनों तक जीवित रहते हैं और 125 से 130 बच्चों तक का कुनबा तैयार कर लेते हैं।

कॉकरोच को अमर जीव कहे जाने के पीछे सबसे बड़ा कारण उसकी अविश्वसनीय जीवित रहने की क्षमता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक अगर कॉकरोच का सिर भी कट जाए, तब भी वह कई दिनों तक जिंदा रह सकता है। सुनने में यह भले फिल्मी लगे, लेकिन इसके पीछे बेहद दिलचस्प विज्ञान छिपा है।

दरअसल कॉकरोच इंसानों की तरह नाक से सांस नहीं लेते। उनके शरीर में छोटे-छोटे छिद्र होते हैं, जिन्हें स्पाइरैकल कहा जाता है। इन्हीं छिद्रों के जरिए हवा सीधे शरीर में पहुंचती रहती है। इसलिए सिर कटने के बाद भी उन्हें सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं होती। आखिरकार वे सिर्फ भूख और पानी की कमी की वजह से मरते हैं।

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