लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बकरीद के त्योहार से पहले राज्य में सड़कों पर नमाज (Namaz) पढ़ने के मामले को लेकर तीखा बयान दिया है। सीएम ने कहा है कि नमाज पढ़नी है, आप शिफ्ट में पढ़िए। प्यार से मानेंगे ठीक है, नहीं मानेंगे तो दूसरा तरीका अपनाएंगे। राजधानी लखनऊ में एक कार्यक्रम के दौरान सीएम ने यह बयान दिया है।
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आपको जानकर हैरानी होगी कि कई बड़े मुस्लिम देशों में खुले या सड़क पर नमाज अदा करना न सिर्फ प्रतिबंधित है, बल्कि ऐसा करने पर भारी-भरकम जुर्माना भी भुगतना पड़ता है। जिस अरब क्षेत्र से इस्लाम का उदय हुआ, वहां के ज्यादातर मुस्लिम बहुल देशों में सड़कों या खुले सार्वजनिक स्थानों पर नमाज अदा करना पूरी तरह से गैरकानूनी माना गया है।
दुनिया में सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया की स्थिति इस मामले में बेहद स्पष्ट है। इस देश में लगभग 8 लाख से ज्यादा मस्जिदें मौजूद हैं। इसके बावजूद वहां किसी भी नागरिक को सड़क पर नमाज पढ़ने की इजाजत नहीं है। सभी लोग सिर्फ मस्जिदों के अंदर जाकर ही इबादत करते हैं। इंडोनेशिया की सरकार ने आम जनता की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए नमाज के दौरान मस्जिदों में बजने वाले लाउडस्पीकरों की आवाज को भी एक तय सीमा के भीतर धीमा रखने के सख्त निर्देश जारी किए हैं।

संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) में भी सार्वजनिक सड़कों पर नमाज अदा करना कानूनन अपराध की श्रेणी में आता है। वहां के नियम इतने कड़े हैं कि अगर कोई व्यक्ति सड़क किनारे अपनी गाड़ी रोककर नमाज पढ़ते हुए पकड़ा जाता है, तो उस पर प्रशासन की तरफ से सीधे तौर पर भारी जुर्माना ठोक दिया जाता है। यूएई प्रशासन के नियमों के मुताबिक, सड़क यातायात को बाधित कर नमाज पढ़ने वाले किसी भी व्यक्ति पर 500 दिरहम का मोटा आर्थिक जुर्माना लगाया जाता है।
पाकिस्तान, बांग्लादेश और यूएई (दुबई और अबू धाबी) जैसे देशों में एक खास व्यावहारिक व्यवस्था भी देखने को मिलती है। जब किसी बड़ी मुख्य मस्जिद या ईदगाह में नमाजियों की संख्या बहुत ज्यादा हो जाती है, तो वहां एक ही जगह पर तय अंतराल के बाद कई शिफ्ट में अलग-अलग जमात कराकर नमाज पूरी कराई जाती है।
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