बंगाल। देश के 5 राज्यों के विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों ने सभी को चौंका दिया है। एक तरफ जहां बंगाल में सत्ता परिवर्तन की सुगबुगाहट है, वहीं दूसरी तरफ तमिलनाडु में नई राजनीतिक पार्टी सबसे आगे निकलती दिख रही है। चुनाव के इन नतीजों के बीच हर किसी के मन में यह सवाल जरूर उठता है कि आखिर वोटों की गिनती कितने राउंड में होती है और इसे कौन और कैसे तय करता है?
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वोटों (vote) की गिनती पूरी तरह से उस विधानसभा क्षेत्र में मौजूद कुल मतदान केंद्रों यानी पोलिंग बूथों की संख्या पर टिकी होती है। इसके अलावा मतगणना केंद्र के हॉल में लगाए गए टेबल की संख्या भी इसमें सबसे बड़ी भूमिका निभाती है। सामान्य तौर पर एक राउंड की गिनती में उतने ही पोलिंग बूथों के वोट गिने जाते हैं, जितने टेबल उस कमरे में लगाए गए होते हैं।
किसी भी विधानसभा सीट की मतगणना के लिए एक हॉल में आमतौर पर 14 टेबल लगाए जाते हैं। मान लीजिए कि किसी विधानसभा क्षेत्र में कुल 280 पोलिंग स्टेशन हैं और वहां गिनती के लिए 14 टेबल लगाए गए हैं। ऐसी स्थिति में कुल पोलिंग स्टेशनों की संख्या को टेबल की संख्या से भाग दिया जाता है। यानी 280 को 14 से भाग देने पर 20 आता है, जिसका मतलब हुआ कि उस सीट पर वोटों की गिनती कुल 20 राउंड में पूरी होगी। अगर किसी सीट पर पोलिंग बूथ ज्यादा हैं तो वहां राउंड बढ़ जाते हैं।

मतगणना वाले दिन सबसे पहले सुबह 8 बजे पोस्टल बैलट यानी डाक मतपत्रों की गिनती शुरू की जाती है। इसमें सरकारी कर्मचारी, सेना के जवान और चुनाव ड्यूटी में लगे लोगों के वोट शामिल होते हैं। इसके ठीक आधा घंटे बाद यानी सुबह 8:30 बजे ईवीएम के वोटों की गिनती शुरू की जाती है। जैसे ही ईवीएम की गिनती शुरू होती है, वैसे ही हर राउंड के बाद आंकड़ों को दर्ज किया जाता है।
जब 14 टेबल पर ईवीएम के वोटों की गिनती पूरी हो जाती है, तो उसे एक राउंड माना जाता है। इसके बाद ही अगले राउंड की ईवीएम को टेबल पर लाया जाता है। हर राउंड की गिनती पूरी होने के बाद उस राउंड के नतीजे को रिटर्निंग ऑफिसर द्वारा ब्लैकबोर्ड या स्क्रीन पर प्रदर्शित किया जाता है और इसकी आधिकारिक घोषणा की जाती है।
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