डेस्क। उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर की पुलिस अधीक्षक (SP) अपर्णा कौशिक एक अपराधी के खिलाफ की गई कार्रवाई के संबंध में आधिकारिक बयान दे रही थीं। जैसे ही मिर्जापुर पुलिस के आधिकारिक इंस्टाग्राम हैंडल से इस वीडियो को साझा किया गया, वह तेजी से वायरल हो गया।
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रिपोर्ट्स बताती हैं कि इस तरह के अपमान से पीड़ित व्यक्ति मानसिक तनाव, अवसाद और सामाजिक अलगाव का शिकार हो सकता है। एक जिम्मेदार पद पर बैठी महिला अधिकारी के खिलाफ ऐसी टिप्पणी करना न केवल अपमानजनक है बल्कि यह ड्यूटी पर तैनात लोक सेवक के मनोबल को गिराने की कोशिश भी है।
भारतीय संविधान या कानून की किताबों में Body Shaming के नाम से कोई अलग या विशेष कानून फिलहाल मौजूद नहीं है। यदि कोई व्यक्ति किसी की शारीरिक बनावट पर ऐसी टिप्पणी करता है, जिससे उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचती है, तो पीड़ित व्यक्ति कानूनी रास्ता अपना सकता है। कानून की नजर में हर नागरिक को सम्मान के साथ जीने का अधिकार है और किसी की बनावट का मजाक उड़ाना इस अधिकार का उल्लंघन है।

मिर्जापुर की घटना जैसे मामलों में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धाराएं सक्रिय हो जाती हैं। यदि कोई व्यक्ति सार्वजनिक रूप से किसी महिला के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करता है, तो उस पर मानहानि के तहत केस दर्ज किया जा सकता है। बीएनस की धारा 500 के तहत दोषी पाए जाने पर आरोपी को 2 साल तक की जेल की सजा हो सकती है या भारी जुर्माना भरना पड़ सकता है। यदि टिप्पणी सोशल मीडिया पर की गई है, तो आईटी एक्ट की धाराएं भी लागू होती हैं, जो डिजिटल प्लेटफॉर्म पर किसी की गरिमा को ठेस पहुंचाने वालों पर शिकंजा कसती हैं।
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